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अर्जुनराम के अफसर से नेता और फिर देश के कानून मंत्री बनने का सफर

अर्जुनराम के अफसर से नेता और फिर देश के कानून मंत्री बनने का सफर

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अर्जुनराम के अफसर से नेता और फिर देश के कानून मंत्री बनने का सफर

अर्जुनराम के अफसर से नेता और फिर देश के कानून मंत्री बनने का सफर

-दिनेश स्वामी/बीकानेर. लोकसभा सीट बीकानेर से तीन बार सांसद निर्वाचित हुए अर्जुनराम मेघवाल की कहानी बड़ी दिलचश्प है। पिछले दिनों उन्होंने अपनी शादी की वर्षगांठ पर बचपन से पचपन तक का कार्यक्रम गुजरात में किया। विवाह के सफल 55 साल पूरे करने के साथ ही उन्होंने समाज में इसे एक संदेश के रूप में देने के लिए कार्यक्रम किया। इससे पहले दाम्पत्य के सफल सफर पर एक किताब भी लिख चुके है।

अर्जुनराम मेघवाल का चयन 1982 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन हुआ था। इसके बाद प्रदेश में अलग-अलग पदों पर रहते हुए नौकरी की। राजस्थान में उपमुख्यमंत्री हरिशंकर भाभा के ओएसडी के रूप में कार्य करने से अर्जुनराम मेघवाल ब्यूरोक्रेसी में लाइम लाइट में आए। इसके बाद आरएएस से पदोन्नत होकर चूरू के जिला कलक्टर के रूप में सेवाएं दी। साल 2009 के चुनाव से पहले मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला उछला। तब वह प्रशासनिक सेवा छोड़कर राजनीति में आने की सोच रहे थे।

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पहले कांग्रेस में जाने की अटकलें लग रही थी लेकिन बताते है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ मतदाता सूची मामले में नाम घसीटने से संबंध बिगड़ गए। इसके बाद वीआरएस लेकर राजनीति में उतरे और पहला चुनाव बीकानेर लोकसभा से 2009 में लड़ा। यह चुनाव जीते और पांच साल सांसद के रूप में अर्जुनराम मेघवाल ने कार्यकाल पूरा किया।

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फिर साल 2014 में नरेनद्र मोदी के नेतृत्व में फिर लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत गए। मोदी का यह पहला कार्यकाल था, अर्जुनराम को सरकार बनने के कुछ समय बाद पहले मंत्रिमंडल विस्तार में जगह मिल गई। इसके बाद साल 2019 के लोकसभा चुनाव में तीसरी बार बीकानेर से चुनाव जीते। तीनों ही चुनावों में अर्जुनराम ने प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी को बड़े अंतर से हराया।