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कैसे कहें आयुष्मान भव…आयुष चिकित्सकों के मामले में हम दसवें पायदान पर

आयुष में राजस्थान फिसड्डी : हमसे तो यूपी-एमपी और बिहार भी बेहतर, महाराष्ट्र में सर्वाधिक आयुष डॉक्टर

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कैसे कहें आयुष्मान भव...आयुष चिकित्सकों के मामले में हम दसवें पायदान पर

कैसे कहें आयुष्मान भव...आयुष चिकित्सकों के मामले में हम दसवें पायदान पर

आशीष जोशी
हर दिन हर एक के लिए आयुर्वेद...पिछले वर्ष मनाए गए 8वें आयुर्वेद दिवस की यह टैग लाइन थी। लेकिन प्रदेश में इससे उलट हालात हैं। कोरोना के बाद से आयुष को लेकर ढोल तो बहुत पीटा जा रहा है। जमीनी तस्वीर उजली नहीं है। आयुष चिकित्सकों की उपलब्धता के मामले में राजस्थान जैसा बड़ा राज्य दसवें पायदान पर है। वहीं आयुष कॉलेज समेत अन्य संसाधनों में भी हम सातवें स्थान पर है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और मध्यप्रदेश जैसे कई राज्यों में राजस्थान से चार गुणा से अधिक आयुष चिकित्सक उपलब्ध हैं। देश में सर्वाधिक आयुष चिकित्सक महाराष्ट्र में हैं। वहीं महाराष्ट्र में 160, कर्नाटक 121, उत्तरप्रदेश 117, गुजरात 81, मध्यप्रदेश 62, तमिलनाडु 50 और राजस्थान में महज 45 आयुष महाविद्यालय हैं। आश्चर्य की बात यह है कि बहुत कम आयुष चिकित्सक होने के बावजूद देश में सर्वाधिक 919 आयुष स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (एएचडब्ल्यूसी) राजस्थान में हैं।

ऐसा एक भी राज्य नहीं जहां आयुष की सभी विधाएं
देश में ऐसा एक भी राज्य नहीं है, जहां आयुष की सभी विधाओं आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा, प्राकृतिक चिकित्सा, सोवारिग्पा और होम्योपेथी के चिकित्सक उपलब्ध हो। केवल कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों में आयुष की छह में से पांच विधाओं के डॉक्टर मौजूद हैं।

यूनानी में यूपी, प्राकृतिक चिकित्सा में कर्नाटक अव्वल
सबसे ज्यादा आयुर्वेद और होम्योपेथी चिकित्सक महाराष्ट्र में हैं। वहीं सर्वाधिक यूनानी चिकित्सक उत्तरप्रदेश में हैं। प्राकृतिक चिकित्सा के मामले में 1059 डॉक्टरों के साथ कर्नाटक नम्बर वन है। सबसे ज्यादा सिद्धा चिकित्सक केरल में है। वहीं जम्मू कश्मीर के अलावा कहीं भी सोवारिग्पा विधा के डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। यहां इस विधा के 54 डॉक्टर हैं।

कहां कितने आयुष चिकित्सक
राज्य - आयुर्वेद - यूनानी - सिद्धा - प्राकृतिक चिकित्सा - सोवारिग्पा - होम्योपेथी - कुल
महाराष्ट्र - 88104 - 7882 - 0 -0 -0 - 78057 - 174043
उत्तरप्रदेश - 43670 - 15730 -0 -0 -0 - 36550 - 95950
बिहार - 34023 - 5423 -0 -0 -0 - 34455 - 73901
गुजरात - 28344 - 362 -0 - 56 -0 - 28508 - 57270
प.बंगाल - 3865 - 5325 -0 -0 -0 - 41368 - 50558
केरल - 30459 - 178 - 2456 - 342 - 0 - 13943 - 47378
मध्यप्रदेश - 20524 - 1950 - 0 - 81 - 0 - 20938 - 43493
कर्नाटक - 19875 - 1199 - 11 - 1059 - 0 - 10713 - 32857
तेलंगाना - 12157 - 5187 - 0 - 390 - 0 - 5500 - 23234
राजस्थान - 11628 - 1200 - 0 - 149 - 0 - 9022 - 21999
(केंद्रीय आयुष मंत्रालय की ओर से जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार आयुष पंजीकृत चिकित्सक)

टॉपिक एक्सपर्ट : क्वालिटी एजुकेशन पर करना होगा फोकस
प्रदेश में आयुष कॉलेजों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। सरकार भी ध्यान दे रही है, लेकिन क्वालिटी एजुकेशन पर फोकस करने की दरकार है। दक्षिणी समेत कई राज्यों में निजी आयुष कॉलेज भी अच्छा काम कर रहे हैं। हम इस मामले में जरा पीछे हैं। आयुष का गुजरात मॉडल भी अपनाया जा सकता है। राजस्थान में आयुष चिकित्सकों के सेलेरी स्ट्रक्चर में भी सुधार होना चाहिए। ताकि नई पीढ़ी का रुझान बढ़ सके।
- प्रो. प्रदीप कुमार प्रजापति, कुलपति, राजस्थान आयुर्वेद विवि, जोधपुर।