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रेगिस्तान में बांस जगाएगा नई आस, एसकेआरयू में होगा शोध

राष्ट्रीय बांस मिशन, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने पश्चिमी राजस्थान में बांस के उत्पादन और उसकी उपयोगिता को लेकर प्रयास प्रारंभ कर दिए हैं। इसके लिए ‘शुष्क पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बांस एक शुरुआत व प्रयास’ विषय पर एसकेआरयू को प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया है।

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रेगिस्तान में बांस जगाएगा नई आस, एसकेआरयू में होगा शोध

रेगिस्तान में बांस जगाएगा नई आस, एसकेआरयू में होगा शोध

रेगिस्तान की सोनलिया मिट्टी में अब न केवल बांस तैयार होगा, बल्कि किसानों के लिए यह आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित होने वाला है। राष्ट्रीय बांस मिशन, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने पश्चिमी राजस्थान में बांस के उत्पादन और उसकी उपयोगिता को लेकर प्रयास प्रारंभ कर दिए हैं। इसके लिए ‘शुष्क पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बांस एक शुरुआत व प्रयास’ विषय पर एसकेआरयू को प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत पश्चिमी राजस्थान में बांस की उपयोगिता पर शोध कार्य भी होगा।

3 साल, 47 लाख रुपए स्वीकृत

स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरुण कुमार के अनुसार एसकेआरयू के उद्यान विभाग को बांस की उपयोगिता, शोध आदि कार्यों के लिए 47 लाख रुपए का प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ है। इस प्रोजेक्ट के तहत पश्चिमी राजस्थान में बांस की उपयोगिता पर शोध करने का अवसर मिलेगा। यह प्रोजेक्ट 3 साल की अवधि का है। इसके अंतर्गत बांस उत्पादन की शस्य विधियों का परीक्षण, उपयुक्त गुणवत्ता युक्त लकड़ी वाल़ी प्रजातियों की पहचान एवं औद्योगिक उपयोगिता की संभावनाओं पर अनुसंधान किया जाएगा।

इन पर भी होगा कार्य

प्रोजेक्ट के मुख्य प्रभारी डॉ. पी. के. यादव ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत विश्वविद्यालय अपने कार्य क्षेत्र में आने वाले किसानों के लिए सूखे के प्रति सहनशील प्रजातियों की पहचान एवं बांस के विभिन्न औद्योगिक सह उत्पाद व मूल्य संवर्धन पर कार्य करेगा। डॉ. सुशील कुमार तथा डॉ. सी. पी. मीणा इस प्रोजेक्ट के सह प्रभारी हैं।