
ईदगाह निर्माण के लिए चार बीघा जमीन के आवंटन पर लगाई रोक
छत्तरगढ़. राजस्थान उच्च न्यायालय ने छत्तरगढ़ के जमीन आवंटन के मामले में दस वर्ष पूर्व का फैसला सुनाया है। तत्कालीन राज्य सरकार की ओर आवंटन अशरफिया मदरसा समिति को ईदगाह निर्माण के लिए चार बीघा जमीन आवंटन के प्रस्ताव पर रोक लगाकर भविष्य में नियमानुसार कार्रवाई के आदेश जारी किए है।
गौरतलब है कि छत्तरगढ़-अनूपगढ़ रोड पर शिवमढी पास तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2009 में कैचमेंट क्षेत्र में 539.5 बीघा जमीन से अशरफिया मदरसा समिति को ईदगाह निर्माण के लिए 4 बीघा जमीन आवंटित करने के लिए आदेश दिए थे।
इस आवंटित मामले को लेकर शिवमढी संचालनकर्ताओं की ओर से एक याचिका जोधपुर हाईकोर्ट में दायर की गई थी। इस पर सीजे एस. रविंद्र भट्ट व जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने दायर जनहित याचिका को स्वीकार कर याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता डीडी चित्तलागियां ने कहा कि वर्ष 2009 में सरकार ने छत्तरगढ़ के कैचमेंट एरिया में जमीन राजस्व रेकॉर्ड में जोहड़ मजकूर नाम से अंकित है।
इसमें से आवेदनकर्ता मदरसा समिति को जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव पारित किया है। जबकि इस जमीन पर गणगौर व शिवरात्रि के मेले लगते हैं तथा इस जमीन पर कस्बे के बच्चे भी खेलते हैं। ऐसे में इसका उपयोग किसी निर्माण के लिए नहीं किया जा सकता है।
इस मामले में शुरू से कोर्ट ने जमीन आवंटन पर अंतरिम रोक लगाई थी। अब दस साल बाद सरकार की ओर से इस आशय का जबाब देकर बताया कि उक्त जमीन राजस्व रेकॉर्ड में जोहड़ मजकूर के नाम से दर्ज हैए। इस पर खंडपीठ ने याचिका को स्वीकार कर निर्णय सुनाकर सरकार की ओर से दस साल पूर्व किए आवंटन पर अंतिम रूप से रोक लगा दी है।
मामले को लेकर आमने-सामने
इस मामले को लेकर दो गुट आमने-सामने भी हुए थे। एक गुट के सदस्यों ने इस मामले का विरोध कर दो दिन तक छत्तरगढ़ का पूरा बाजार बंद भी रखा था तथा इस मामले पर कस्बे में तनावपूर्ण स्थिति में भी बनी थी। वहीं दोनों गुटों के लोगों पर मुकदमेबाजी भी हुई थी और कई लोगों पर अभी भी मामले बीकानेर न्यायालय में चल रहे हैं।
Published on:
14 Sept 2019 06:01 am
