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परंपरागत फसलों के साथ किसानों को सब्जियों की खेती से हो रहा फायदा

बीकानेर के महाजन क्षेत्र में सिंचित काश्तकार परंपरागत खेती के साथ सब्जियों की भी खेती कर दोहरा लाभ ले रहे हैं।

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परंपरागत फसलों के साथ किसानों को सब्जियों की खेती से हो रहा फायदा

परंपरागत फसलों के साथ किसानों को सब्जियों की खेती से हो रहा फायदा

बाजार में बिक्री से हो रहा दोहरा फायदा
किसान रोहिताश चौधरी ने बताया कि सरसों, गेहूं ,चना आदि परपंरागत फ सलों के साथ खेत के कुछ हिस्से पर सब्जियों की भी बुवाई की है। इससे परिवार को बाजार से महंगे दामों में सब्जियां नहीं खरीदनी पड़ेंगी। साथ ही बाजार में बिक्री से दोहरा फायदा भी होगा। किसान सुरजीत धतरवाल ने बताया कि हर साल नहरों से सिंचित खेतों में हाड़ी व सावणी की फ सल में प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान हो रहा था।

देखभाल में आसानी
किसान आलू, सोगरी, मटर,पालक, मेथी, हरा धनिया, गोभी, गाजर, मूली सहित लहसुन की बुवाई पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। किसान गंगारतन ने बताया कि सिंचाई व खाद देते समय भी किसानों को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। एक- डेढ़ बीघा में बोई सब्जियों की देखभाल आसानी से की जा सकती है।

मिलता है सरकार से अनुदान
सब्जियों की बुवाई के लिए किसानों को राज्य सरकार अनुदान देती है। सामान्य कृषक को ड्रिप व स्प्रिंकलर के लिए 70 प्रतिशत, अनु. जाति के किसानों व महिला काश्तकार को 75 प्रतिशत तक अनुदान देय है।

इनका कहना है...
किसानों को इससे दोहरी आमदनी हो रही है। सिंचित खेतों में सब्जियों की बुवाई कारगर साबित हो सकती है। सरकार की ओर से इसके लिए 70 से 75 प्रतिशत तक अनुदान भी दिया जाता है। - अब्दुल अमीन, (सहायक कृषि अधिकारी)

लूणाराम वर्मा — महाजन