
बीकाणा बैलून
बीकानेर. प्रसूताओं में प्रसव के बाद अधिक रक्तस्राव यानी पीपीएच को रोकने में अब 'बीकाणा बैलून' सहायक बनेगा। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुदेश अग्रवाल ने महंगे बाकरी बैलून उपकरण का प्रभावी जुगाड़ वर्जन तैयार कर प्रत्येक छोटे से छोटे स्वास्थ्य केंद्र पर भी प्रसूता को बचा पाने का नायाब रास्ता निकाला है। बीकाणा बैलून की खासियत है कि इसे जरूरत पडऩे पर सामान्यतया उपलब्ध सर्जिकल ग्लव्ज व कैथेटर की सहायता से बनाया जा सकता है।
दे रहे प्रशिक्षण
जिले के दूर-दराज के चिकित्सकों व महाविद्यालय के इंटर्न को पीबीएम अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में स्टॉप अर्थात स्टेप टुवड्र्स मैनेजमेंट एंड प्रिवेंशन ऑफ पीपीएच का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डॉ. सुदेश अग्रवाल के नेतृत्व में डॉ. कमला वर्मा, डॉ. मूलचंद खत्री, डॉ. सुषमा गौड़ व डॉ. शैफाली महाजन प्रशिक्षुओं को पीपीएच की स्थिति बनने से रोकने और पीपीएच होने पर प्रबंधन का प्रशिक्षण दे रहे हैं।
डॉ. अग्रवाल के अनुसार पीपीएच प्रबंधन में एक-एक सेकंड की कीमत बढ़ जाती है और तुरंत निर्णय व उपचार से प्रसूता की जान बचाई जा सकती है। सीएमएचओ डॉ. देवेन्द्र चौधरी के अनुसार जिले के ग्र्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों को इसका प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा।
ऐसे करता है काम
डॉ. सुदेश अग्रवाल के अनुसार अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में इसे प्रसूता के गर्भाशय में अंतरित कर फ्लूइड से स्फीत किया जाता है, जिससे रक्तस्राव नियंत्रित हो जाता है। कई मामलों में रक्तस्राव पूर्णतया बंद हो जाता है, तो
कई बार दुबारा भी शुरू जो जाता है, लेकिन उच्चतर संस्थान तक पहुंचने के बाद भी उसके प्रबंधन
के लिए पर्याप्त समय और संभावनाएं बन जाती हैं।
यह है पीपीएच
प्रशिक्षक दल में शामिल डॉ. कमला वर्मा के अनुसार प्रसव के दौरान यदि 500 मिली से अधिक रक्त बह जाए तो पोस्टपार्टम हेमरेज यानी पीपीएच माना जाता है। ये आमजन के लिए भी जानना जरूरी है कि रक्त बहकर स्पष्ट रूप से कपड़ों से बाहर गिरने लगे, सांस में तकलीफ व बेहोशी आने लगे तो ये पीपीएच की श्रेणी में आएगा। डिलिवरी के दौरान 10 फीसदी महिलाओं को पीपीएच की समस्या होती है।

Published on:
26 Aug 2017 12:25 pm
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