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आचार्य महाश्रमण के स्वागत में उमड़ा श्रद्धा का जन सैलाब

कालू में अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्य महाश्रमण का मंगल पदार्पण, 104 वर्षीय सुदीर्घजीवी साध्वीश्री बिदामा को शांतिदूत ने दिए दर्शन

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आचार्य महाश्रमण के स्वागत में उमड़ा श्रद्धा का जन सैलाब

आचार्य महाश्रमण के स्वागत में उमड़ा श्रद्धा का जन सैलाब

कालू, तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें अधिशास्ता आचार्य महाश्रमण का शनिवार को कालू की धरा पर मंगल पदार्पण हुआ। आचार्यश्री के स्वागत में कस्बा महाश्रमणमय नजर आया। जैन ही नहीं अपितु जैनेत्तर समाज भी अहिंसा यात्रा प्रणेता के स्वागत के लिए उल्लसित था। सूर्योदय के समय आचार्यश्री ने गारबदेसर से मंगल प्रस्थान किया।

जैसे जैसे गुरुदेव कालू की ओर बढ़ रहे थे। आराध्य की अगुवानी में श्रद्धालु संख्या भी बढ़ती जा रही थी। करीब आठ वर्षों के बाद आचार्य प्रवर के आगमन से हर ओर हर्षोल्लास का माहौल था। पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम में परिवर्तन कर कालू में गुरुदेव की ओर से दो दिवसीय प्रवास फरमाने से कालूवासियों का श्रद्धा उमंग और द्विगुणित हो गया। गणवेश में जयघोषों के साथ श्रावक समाज जुलूस द्वारा गुरुदेव का स्वागत कर रहे थे।

करीब 13 किमी विहार कर आचार्यश्री कालू पधारे और सर्वप्रथम तेरापंथ भवन में लंबे समय से विराजित सुदीर्घजीवी 104 वर्षीय साध्वीश्री बिदामा को दर्शन प्रदान किए। साध्वीश्री बिदामा तेरापंथ धर्मसंघ की सबसे अधिक आयु प्राप्त साध्वी है। आचार्यश्री की ओर से शतायु साध्वीजी को दर्शन सेवा कराते देख हर कोई भावविभोर हो गया। तत्पश्चात वहां से आचार्यप्रवर दो दिवसीय प्रवास के लिए ओसवाल पंचायत प्रन्यास भवन में पधारे।

मंगल प्रवचन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य जिस प्रकार के कर्म करता है उसी प्रकार उसे फल भोगने पड़ते हैं। कर्म आत्मा से जुड़े हुए हैं। जब तक आत्मा से कर्मों का जुड़ाव है। तब तक जन्म-मरण का क्रम भी चलता रहता है। जब सभी कर्म क्षय हो जाते हैं तो जन्म-मरण का क्रम भी समाप्त हो जाता है। व्यक्ति को यह ध्यान देना चाहिए कि उसके द्वारा कोई भी दुराचार व पापकार्य ना हो। भले का भला फल तो बुरे का बुरा फल होता है हम करें तो किसी का भला करें किसी का बुरा क्यों करना। जीवन में धर्म रहे और सत्कर्म रहे तो यह जीवन सफल बन सकता है।

आचार्यश्री ने आगे कहा की आज कालू में आगमन हुआ है। तेरापंथ के आठवें आचार्य कालूगणी थे। गुरु के नाम से जुड़ा हुआ यह गांव है। यहां पर आध्यात्मिकता बढ़ती रहे। सुदीर्घजीवी साध्वी बिदामा से भी आज मिलना हो गया। आप तेरापंथ धर्मसंघ की एकमात्र साध्वी है जो शतायु है। इन्होंने चार साध्वीप्रमुखा व तीन आचार्यों का शासन देखा है। जैसे मेवों में बादाम होता है। वैसे ही साध्वी समुदाय में साध्वी बिदामा जी शोभायमान हो रही है।

इस अवसर पर साध्वी उज्ज्वलरेखा आदि साध्वियों ने गीतिका का संगान किया। आचार्य महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष नगराज बरमेचा, तेरापंथ सभा अध्यक्ष सुशील बरमेचा, तेरापंथ युवक परिषद एवं किशोर मंडल से करण नाहटा ने विचार रखे। तेरापंथ महिला मंडल, कन्या मंडल एवं ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने गीतों की प्रस्तुति दी।