
इस अखाड़े में सवा सौ साल से लग रहा हेड़ाऊ-मेहरी का दरबार
शहर में होली के अवसर पर मंचित होने वाली रम्मतों में प्रेम और श्रृंगार रस प्रधान रम्मत हेड़ाऊ मेहरी अपने कथानक अनुसार पारंपरिक गीत, दोहों और मेहरी पात्रों के नृत्यों के लिए प्रसिद्ध है। बारह गुवाड़ चौक में इस रम्मत का मंचन करीब 125 साल से होना बताया जा रहा है। रम्मत कथानक अनुसार, गाए जाने वाले विभिन्न पारंपरिक गीतों को सुनने के लिए पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं भी रम्मत स्थल पर मौजूद रहती हैं।
रम्मत मंचन के दौरान गाए जाने वाले गीत और दोहों के दौरान रम्मत कलाकारों की बुलंद आवाज ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। इस बार इस रम्मत का मंचन 5 मार्च की रात्रि को प्रारंभ होगा व 6 मार्च की सुबह तक चलेगा।
इन गीतों का गायन
रम्मत कलाकार बी आर सूरदासाणी के अनुसार हेड़ाऊ मेहरी रम्मत के दौरान राजसी ठाठ-बाट का दृश्य बनता है। रम्मत कथानक अनुसार हेड़ाऊ, नुरसा और मेहरी पात्रों के माध्यम से रम्मत का मंचन होता है। दोहे और गीत प्रमुख हैं। गीतों में कुंभलनेर, तीज, चाकरी, जल्लो, मजलिस, नींबूड़ो, नगीनो, रुसणो, मनावणा, पायल, मरोड़ी, मजमौनी, लोरी सहित कई गीतों का गायन रम्मत कलाकार करते हैं।
इन्होंने दी ऊंचाइयां
हेड़ाऊ मेहरी रम्मत के कलाकार फरसराम पुरोहित, लालचंद पुरोहित, देवकिशन पुरोहित, चतुर्भुज छंगाणी, पूनम चंद पुरोहित, मोहन लाल, बद्री विशाल छंगाणी, गोपाल पणिया, जय किशन पुरोहित, नुक्का महाराज, दुर्गादत्त किराडू, सुंडिया महाराज, बुलाकी दास पुरोहित, गोपी किशन पुरोहित, बृजमोहन पुरोहित, चांद रतन व्यास, गणिया महाराज, गोपाल पुरोहित, शांति लाल पुरोहित, राधा किशन, सत्यनारायण, आशानंद पुरोहित भैंरु सहित कई कलाकारो ने इस रम्मत को ऊंचाइयां प्रदान की हैं।
इन पात्रों से मंचन
हेड़ाऊ मेहरी रम्मत की शुरुआत अखाड़े में भगवान गणेश स्वरूप के पदार्पण व स्तुति वंदना से होती है। जाट-जाटणी, बोहरा-बोहरी व खाकी स्वांग पात्रों के पारंपरिक गीत-नृत्यों के माध्यम से अच्छे जमाने व सभी के लिए मंगल कामनाएं की जाती हैं। इसके बाद रम्मत कथानुसार हेड़ाऊ, नुरसा व मेहरा पात्र अखाड़े में पहुंचते हैं व पूरी रात इन पात्रों के माध्यम से रम्मत का मंचन होता है। गायन में सहयोगी कलाकारों के दो ग्रुप बनते हैं। वाद्य यंत्रों में नगाड़ा और छमछमा प्रमुख होते हैं।
हेड़ाऊ मेहरी रम्मत
स्थान : बारह गुवाड़ चौक
संस्थान : श्री शिव जबरेश्वर नाट्य एवं कला संस्थान
रम्मत : हेड़ाऊ मेहरी
अखाड़ा : उस्ताद तनसुख दास रंगा
मंचन : 5 मार्च की रात से 6 मार्च की सुबह तक
Published on:
23 Feb 2023 10:44 am
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