
यहां भगवान धनवंतरि के केला-सिंघाड़ा का लगता है भोग
गंगाशहर रोड चौपड़ा स्कूल के सामने िस्थत राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र परिसर िस्थत भगवान धनवंतरि का मंदिर दशकों से श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा का केन्द्र है। यहां प्रतिदिन श्रद्धालु मंदिर में पहुंचकर आरोग्य सुख की कामना करते है। साल भर यहां पूजन-अर्चन का क्रम चलता रहता है। पांच दिवसीय दीपोत्सव के पहले दिन धनतेरस को प्राकट्य दिवस पर भगवान धनवंतरि की विशेष पूजा-अर्चना, आरती और दर्शन-पूजन का क्रम चलता है। केन्द्र के मंत्री बनवारी लाल शर्मा के अनुसार वर्ष 1970 में केन्द्र की स्थापना हुई। वर्ष 1971 में केन्द्र परिसर में भगवान धनवंतरि की प्रतिमा स्थापित की गई। इसमें वैद्य महावीर प्रसाद शर्मा की भूमिका अहम रही।
अष्ट धातु से निर्मित, 11 इंच ऊंचाई
भगवान धनवंतरि मंदिर में स्थापित भगवान धनवंतरि की प्रतिमा अष्टधातु से निर्मित है। केन्द्र की चिकित्सा अधिकारी डॉ. वत्सला गुप्ता के अनुसार प्रतिमा की ऊंचाई 11 इंच है। चतुर्भुज प्रतिमा वरदायिनी है। एक हाथ में अमृत कलश है। मंदिर पुजारी पंडित शिवानंद पारीक के अनुसार मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहता है। दर्शनार्थियों के साथ केन्द्र में उपचार के लिए आने वाले मरीज भी भगवान धनवंतरि का दर्शन-पूजन कर आरोग्य सुख की कामना करते है।
51 साल प्राचीन प्रतिमा
प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र परिसर में िस्थत मंदिर में 51 साल प्राचीन भगवान धनवंतरि की प्रतिमा है। डॉ. गुप्ता के अनुसार धनतेरस के दिन पंचामृत अभिषेक, पूजन, आरती के साथ इस दिन भगवान धनवंतरि के केला और सिंघाडा का विशेष भोग अर्पित किया जाता है। पिछले 51 वर्षों से यह परम्परा चल रही है। केला और सिंघाडा आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के लिहाज से दोनों ही स्वास्थ्य के लिए उत्तम और गुणकारी है। श्रद्धालुओं में इस प्रसाद का वितरण किया जाता है। रविवार सुबह 8.30 बजे मंदिर में भगवान धनवंतरि का पंचामृत से अभिषेक-पूजन कर आरती की जाएगी।
Published on:
23 Oct 2022 04:21 pm
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