
आय बढ़ रही न घट रही समस्याएं, अधिकारी-जनप्रतिनिधि व्यस्त, आमजन त्रस्त
नगर निगम में आमजन की जनसमस्याएं सबसे अंतिम पंक्ति में पहुंच गई है। निर्माण व विकास कार्यों के टेंडर तथा आए दिन हो रहे सफाई कर्मचारियों के एक वार्ड से दूसरे वार्ड में स्थानांतरण प्रमुख बन कर रह गए है। आमजन की समस्याओं पर न सदन में चर्चा हो रही है और ना ही निगम की आय बढ़ोतरी को लेकर गंभीर प्रयास नजर आ रहे है। आए दिन लाखों रुपए के टेंडर हो रहे है, लेकिन चल रहे कार्यों की प्रभावी मॉनिटरिंग नजर नहीं आ रही है। महापौर और आयुक्त के बीच चल रहा मनमुटाव शहर के विकास में रोडा बन रहा है। िस्थति यह है कि आमजन की समस्याओं को लेकर निगम में पहुंच रहे पार्षद भी जनसमस्याओं का पूरा समाधान नहीं करवा पा रहे है।
अधिकारी-कर्मचारी अभियान-योजनाओं में व्यस्त
नगर निगम का पहला दायित्व आमजन की जनसमस्याओं का समाधान करना है। अपनी सेवाओं में सुधार करना है। हकीकत इसके विपरित बनी हुई है। निगम के अधिकतर अधिकारी-कर्मचारी प्रशासन शहरों के संग अभियान, इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना, इंदिरा रसोई, प्रधानमंत्री आवास योजना,आरटीआई, सम्पर्क पोर्टल, बैठकों आदि में व्यस्त है। इनमें अभियंताओं से लेकर राजस्व शाखा और मंत्रालयिक कर्मचारी तक शामिल है। शहर की सफाई, बेसहारा पशु, सार्वजनिक प्रकाश, कचरा परिवहन, सीवरेज सफाई, यूडी टैक्स वसूली, निर्माण स्वीकृति, बकाया राशि की वसूली सहित अन्य कार्यो की तरफ न ध्यान दिया जा रहा है और ना ही प्रभावी मॉनिटरिंग हो पा रही है।
धड़ों में बंटे पार्षद, वार्डों तक हुए सीमित
निगम में सत्तारुढ़ बोर्ड और विपक्ष आमजन को हो रही समस्याओं को मुखरित ढंग से सदन व निगम प्रशासन के समक्ष नहीं रख पा रहे है। पक्ष-विपक्ष के पार्षद कई अवसरों पर धड़ों में बंटे नजर आए है। इससे आमजन की पीड़ा प्रभावी ढंग से प्रशासन व शासन के समक्ष नहीं पहुंच पा रही है। निगम में पार्षदों की कमेटियों के अब तक अधर में लटके रहने का खमियजा भी शहर की जनता भुगत रही है। जनसमस्याओं को लेकर अधिकतर पार्षद अपने-अपने वार्डों तक ही सीमित नजर आ रहे है।
आय बढ़ोतरी में फिसड्डी
नगर निगम में राजस्व प्राप्ति बढ़ाने को लेकर न अधिकारी गंभीर है और ना ही जनप्रतिनिधि। निगम 17 साल पहले हुए सर्वे के आधार पर अब तक नगरीय विकास कर वसूल रहा है। जबकि सर्वे दुबारा हो तो न केवल यूडी टैक्स के दायरे में आने वाली संपत्तियां बढ़ेगी बल्कि आय भी लगभग दुगुनी हो जाएगी। घर-घर कचरा संग्रहण से यूजर चार्ज वसूली की प्रक्रिया भी कछुए की चाल की तरह है। निगम अनुबंधित फर्म के माध्यम से इसे प्रभावी ढंग से वसूल नहीं करवा पा रही है। फायर एनओसी, फायर सेस, निर्माण स्वीकृति आदि से आय को लेकर भी गंभीर प्रयास नहीं हो रहे है। गंदे पानी के शोधन के बाद उसको बेच नहीं पा रहा है।
आयुक्त जिम्मेदार
निगम की पटरी से उतर रही व्यवस्थाओं के लिए आयुक्त जिम्मेदार है। आयुक्त स्थानीय विधायक एवं मंत्री के इशारे पर कार्य कर रहे है। गलत तरीके से निविदाएं लगाना, कर्मचारियों के ट्रांसफर करना, बार-बार प्रभारी बदलने से व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही है। स्वास्थ्य अधिकारी पर नियंत्रण नहीं है। सफाई व्यवस्था चौपट है। प्रशासन शहरों के संग अभियान में काम हो रहा है और ना ही रोजगार गारंटी योजना में। योजना के तहत अब तक स्टाफ की नियुक्ति भी नहीं हो पाई है।
सुशीला कंवर राजपुरोहित, महापौर, नगर निगम, बीकानेर।
भाजपा बोर्ड ने नहीं होने दी मीटिंग
निगम आयुक्त के नेतृत्व में निर्माण एवं विकास कार्य हुए है। निगम सेवाओं में सुधार आया है। वार्डों में विकास कार्यों में तेजी आई है।आमजन व पार्षदों की ओर से बताई जा रही समस्याओं को भी गंभीरता पूर्वक सुनते है। जनसमस्याओं के समाधान व राजस्व प्राप्ति के संबंध में चर्चा कर निर्णय लेने के लिए आयुक्त ने साधारण सभा बुलाने के लगातार प्रयास किए है। लेकिन महापौर व भाजपा बोर्ड की ओर से मीटिंग बुलाने नहीं दी गई है।
चेतना चौधरी, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम, बीकानेर।
Published on:
22 Sept 2022 06:13 pm
बड़ी खबरें
View Allबीकानेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
