
एक ताने पर बसा है यह शहर
बीकानेर नगर की स्थापना राव बीका ने संवत 1545 में अक्षय द्वितीया के दिन की थी। राव बीका जोधपुर राज्य के शासक राव जोधा के बड़े पुत्र थे। जो वीर एवं पराक्रमी थे। इतिहासकार जानकी नारायण श्रीमाली बताते है कि विक्रम संवत 1522 में एक दिन राव जोधा का दरबार लगा हुआ था। किसी कारण राव बीका दरबार में पहुंचने में देर हो गए। दरबार में पहुंचकर राव बीका अपने काका राव कांधल के पास बैठ गए। दरबार चल रहा था। उसी समय राव बीका व काका कांधल किसी विषय पर आपस में चर्चा करने लगे। यह देख राव जोधा ने व्यंग्य में कहा कि - काका-भतीजा कांई बात्यां कर रयो हो, कोई नयो राज थापित कर रया हो क्या। राव जोधा की यह बात सुनकर राव बीका व कांधल असहज हुए और कहा कि - आपरो हुकुम हुवे और आज्ञा हुवै तो नयो राज भी थापित कर दिखा देवों।
जानकी नारायण श्रीमाली के अनुसार राव बीका जांगलू के शासक नापा सांखला के भानजे थे। राव बीका, राव कांधल इस दरबार में हुई घटना के बाद कुछ सैनिकों और घुड़सवारों को लेकर आज के बीकानेर की ओर निकल पड़े। राव बीका ने मां करणी से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। मां करणी ने राव बीका को आशीर्वाद दिया था कि -थ्हारो राज जोधा रै राज सूं भी बड़ो हुयसी। इसके बाद राव बीका जांगलू गए व कुछ समय ठहरे। इसके बाद चांडासर गजनेर व कोडमदेसर में ठहरे।इस दौरान राव बीका व राव कांधल ने कई युद्ध किए। 1542 में आज के बीकानेर शहर की ओर आए व नगर स्थापना को लेकर कार्य प्रारंभ किया। पहले राव बीका राती घाटी क्षेत्र में आए व अपने साथियों के साथ पड़ाव डाला। सलाहकारों से परामर्श करने के बाद उन्होंने क्षेत्र में किले की नींव रखी। टेकरी स्थल पर ठहरे।विक्रम संवत 1545 को अक्षय द्वितीया के दिन नगर की स्थापना की। लक्ष्मीनाथ घाटी के नीचे राव बीका टेकरी स्थल है। जहां राव बीका, राव लूणकरन व राव जैतसी के समाधि स्थल भी है। आज जहां लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर है वहां सौभाग्यदीप गढ़ था। यहां लक्ष्मीनाथ, देवी चामुण्डा और देवी नागणेचीजी के प्राचीन मंदिर है। प्राचीन कुआ भी है।
Published on:
22 Apr 2023 07:13 am
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