उगते सूर्य के पूजन के बाद 36 घंटे से निर्जल रहकर हुए व्रत का पारणा किया गया। व्रती लोगों ने पारंपरिक रुप से प्रसाद का वितरण किया। बिहारी निवासी परिवारों ने अपनी परंपरा अनुसार छठ पूजा उत्सव पारंपरिक रस्मों, पूजन पद्धति, आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया।छठ पूजन उत्सव के अंतिम दिन सुबह से ही पवित्र सरोवर स्थलों पर लोगों के पहुंचने का क्रम शुरु हो गया।