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दो घंटे में दौड़कर देशनोक लेकर जाएंगे डाक ध्वजा

देशनोक करणी माता धाम के लिए 4 फरवरी को डाक ध्वजा बीकानेर से रवाना होगी। बीकानेर से देशनोक की दूरी लगभग 30 किमी दो घंटे में दौड़कर पूरी की जाएगी व डाक ध्वजा करणी माता मंदिर पहुंचेगी।

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दो घंटे में दौड़कर देशनोक लेकर जाएंगे डाक ध्वजा

दो घंटे में दौड़कर देशनोक लेकर जाएंगे डाक ध्वजा

देशनोक करणी माता धाम के लिए 4 फरवरी को डाक ध्वजा बीकानेर से रवाना होगी। रामप्रकाश मेमेारियल ट्रस्ट के तत्वावधान में पुरानी गिन्नानी क्षेत्र से ताम्र से बनी डाक ध्वजा को श्रद्धालु दौड़ते हुए लेकर जाएंगे। बीकानेर से देशनोक की दूरी लगभग 30 किमी दो घंटे में दौड़कर पूरी की जाएगी व डाक ध्वजा करणी माता मंदिर पहुंचेगी। आयोजन से जुड़े जयप्रकाश के अनुसार 4 फरवरी को दोपहर 1.15 बजे पुरानी गिन्नानी क्षेत्र िस्थत हरजी सोनी के निवास से डाक ध्वजा की रवानगी गाजे-बाजे के साथ होगी व दोपहर 3.15 बजे देशनोक करणी माता मंदिर पहुंचेगी। डाक ध्वजा गिन्नानी से केईएम रोड, कोटगेट, पुरानी जेल रोड, गुर्जरों का मोहल्ला होते हुए गोगागेट तक पहुंचेगी। यहां से डाक ध्वजा देशनोक के लिए जाएगी। महावीर पारीक के नेतृत्व में डाक ताम्र ध्वजा देशनोक करणी माता मंदिर पहुंचेगी। डाक ध्वजा पहुंचाने में सैकड़ो श्रद्धालु शामिल होंगे।

पर्ची पर लिखेंगे मनोकामना, पहुंचाएंगे करणी धाम

डाक ध्वजा के माध्यम से श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं को देशनोक करणी धाम भी पहुंचाया जाएगा। डाक ध्वजा के दौरान श्रद्धालु कागज की पर्चियों पर अपनी मनोकामनाएं लिखकर डाक ध्वजा के साथ चलने वाले एक थैले में डालेंगे। इन सभी मनोकामनाओं को मां करणी के दरबार में पहुंचाया जाएगा। यह थैला जयप्रकाश पारीक के हाथ में रहेगा। श्रद्धालु अपनी मनोकामना इस थैले में डाल सकेंगे।

3 किलोग्राम वजन, ताम्र से बनी

देशनोक करणी माता मंदिर पहुंचने वाली डाक ध्वजा ताम्र धातु से बनाई गई है। जय प्रकाश पारीक के अनुसार डाक ध्वजा का वजन 3 किलोग्राम है। डाक ध्वजा पर त्रिशुल व जय माता री लिखे गए है। मीने का कार्य भी डाक ध्वजा पर करवाया जा रहा है। इस ध्वजा को मंदिर में अर्पित किया जाएगा।