
नूवीं हवेली में पौढ़े गवरजा, खसखस का पंखा
ईसर गयो परदेश कमावण रुपियों री थैली, म्हारी चांद गवरजा, नूवीं हवेली में पौढ़े गवरजा, ईसर आयो गवरल आंगणै और पूजण दो गणगौर सरीखे गीतों की गूंज घर-घर और मोहल्लों में है। सुबह से शुरु हो रहा गणगौर पूजन का क्रम देर रात तक चल रहा है। गणगौर प्रतिमाओं के पूजन पानी पिलाने, भोग अर्पित करने, दांतणिया देने, घुड़ला घुमाने, बासा देने की रस्में चल रही है। पारंपरिक गणगौरी गीत-नृत्यों के आयोजन चल रहे है। धुलंडी के दिन से चल रहा 34 दिवसीय गणगौर पूजन उत्सव परवान पर है। बालिकाएं और महिलाएं मां गवरजा व ईसर के पूजन और भक्ति से सराबोर है।
प्रतिमाओं के छप्पन भोग अर्पित
गणगौर पूजन के साथ बालिकाएं प्रतिमाओं के विविध पकवानों को भोग भी अर्पित कर रही है। बारह गुवाड़ चौक में एक निवास पर सामूहिक गणगौर पूजन में गणगौर प्रतिमाओं के आगे छप्पन भोग श्रृंगारित किए गए। इस दौरान संतोष, पुष्पा, गोपिका, निर्मला, सावित्री, शकुंतला, मंजू, जया, सुशीला, राखी, मोनिका, वीणा, कविता, संजू, अंजलि, सोनू, गुड्डू, प्रिया आदि महिलाओं व बालिकाओं ने पारंपरिक गणगौर गीतों का गायन किया व प्रतिमाओं के आगे नृत्य प्रस्तुत किए।
दे रही दातणियां, घूम रहा घुड़ला
धुलंडी के दिन से चल रहे सोलह दिवसीय बाला गणगौर पूजन उत्सव में बालिकाएं दातणियां व घुड़ला घुमाने की रस्मों का भी निर्वहन कर रही है। घरों के आस-पास मंदिरों, हवेलियों, बगीचीयों, चौकियों, भवन आदि की चौकियों व दीवारों पर अबीर-गुलाल से चित्र उकेर रही है। वहीं मिट्टी से बने घुड़ले में प्रज्जवलित दीपक रखकर घर, परिवार और मोहल्ले में घर-घर पहुंच रही है। सुबह घरों की छतों पर मिट्टी के पालसिए में मां गवरजा का पूजन कर देर शाम को बासा देने की रस्म निभा रही है।
घर-घर पूजन, गूंज रहे गीत
गणगौर पूजन उत्सव में घर-घर मां गवरजा और ईसर-भाइया की प्रतिमाओं का पूजन चल रहा है। बालिकाएं व महिलाएं पूजन के दौरान पारंपरिक गणगौरी गीतों का गायन कर रही है। प्रतिमाओं के आगे नृत्य का क्रम देर रात तक चल रहा है। हरोलाई हनुमान मंदिर के पास िस्थत श्री आत्मेश्वर महादेव मंदिर परिसर में सोमवार को गणगौर पूजन और गीत-नृत्य का आयोजन हुआ।
Published on:
21 Mar 2023 10:09 pm
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