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पारंपरिक वस्त्र-आभूषणों से सज रही गणगौर प्रतिमाएं

गणगौर प्रतिमाओं की बिक्री के साथ-साथ प्रतिमाओं की रंगाई और प्रतिमाओं को पारंपरिक वस्त्र-आभूषणों से सजाने का कार्य प्रारंभ हो गया है। पुरानी व प्राचीन गणगौर प्रतिमाओं को नया स्वरुप देने के लिए रंगाने और सजावट का दौर शुरू हो गया है।

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होली से गणगौर पूजन उत्सव प्रारंभ होगा। 34 दिवसीय गणगौर पूजन उत्सव तीन चरणों में होगा। इस दौरान शहर में घर-घर, गली-मोहल्लों में ईसर, गवर और भाईया प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना होगी। जगह-जगह गणगौर के मेले भरेंगे। गणगौरी गीतों का गायन होगा। इस दौरान बाला गणगौर, बारहमासा और धींगा गणगौर प्रतिमाओं की पूजा-अर्चना होगी। गणगौर पूजन उत्सव को लेकर शहर में गणगौर बाजार सज चुके है। गणगौर प्रतिमाओं की बिक्री के साथ-साथ प्रतिमाओं की रंगाई और प्रतिमाओं को पारंपरिक वस्त्र-आभूषणों से सजाने का कार्य प्रारंभ हो गया है। पुरानी व प्राचीन गणगौर प्रतिमाओं को नया स्वरुप देने के लिए रंगाने और सजावट का दौर शुरू हो गया है। भुजिया बाजार िस्थत महात्मा चौक सहित अनेक स्थानों पर गणगौर प्रतिमाओं की बिक्री, रंगाने और सजावट का कार्य चल रहा है।

प्रतिमाओं को दे रहे नया स्वरुप

गणगौर पूजन उत्सव को लेकर पुरानी और प्राचीन गणगौर प्रतिमाओं को रंगने का कार्य भी चल रहा है।गणगौर प्रतिमाओं की रंगाई और सजावट व्यवसाय से जुड़े आसू महात्मा के अनुसार बड़ी संख्या में गणगौर प्रतिमाएं नया रंग करवाने के लिए पहुंच रही है। एनामिल और नेचुरल दो प्रकार के कलर प्रतिमाओं के हो रहे है। प्रति प्रतिमा रंगने की दर 400 से 2000 हजार रुपए तक है। यह दर गत वर्ष की तुलना में इस बार बढ़ी है।महात्मा के अनुसार कलर की दर और पेंटर की मजदूरी बढ़ने का असर रंगाई कार्य पड़ा है।

इन आभूषणों से हो रही श्रृंगारित

गवर, ईसर और भाईया की प्रतिमाओं को पारंपरिक आभूषणों से श्रृंगारित किया जा रहा है। प्रतिमाओं की सजावट के लिए कुंदन जड़ाऊ सेट, एडी नग सैट, आर्टिफिशियल स्टोन सैट आकर्षण का केन्द्र है। सैट में रखड़ी, नथ, टीका, बंगड़ी, चूडि़यां, पंखी हार, चीर पट्टी, बाजूबंद, कंदौला सहित कई पारंपरिक आभूषण है। वहीं बिना सैट के भी गणगौर प्रतिमाओं को पारंपरिक आभूषणों से सजाया जा रहा है।

लहंगा-चुनरी व अचकन- साफा

गणगौर प्रतिमाएं पारंपरिक वस्त्रों से सज रही है। राजस्थानी वस्त्रों के साथ-साथ गुजराती पैटर्न के वस्त्र भी महिलाओं को पसंद आ रहे है। कई प्रतिमाएं गरबा ड्रेस से भी श्रृंगारित हो रही है। वहीं गवर की प्रतिमाएं पारंपरिक कुर्ती-काचली, लहंगा चूनरी से सज रही है। ईसर प्रतिमाएं अचकन, धोती-चोला, साफा से सज रही है। ईसर प्रतिमाओं के सिर पर लहरिया, बंधेज, जोधपुरी, राजपूती साफे, चुनरी साफे, राजस्थानी पाग सज रहे है। कानों में कुंडल, कमर में कटार, कमरबंद, गले में हार, साफे पर कलंगी से प्रतिमाएं कलात्मक रुप से सज रही है।