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घर-घर गणगौर पूजन, गूंज रहे गीत, घूम रहा घुड़ला

घर-घर में गणगौर पूजन चल रहा है। बालिकाएं व महिलाएं गणगौर प्रतिमाओं के आगे पारंपरिक गणगौरी गीतों का गायन कर गणगौर प्रतिमाओं के विविध व्यंजनों का भोग अर्पित कर रही है। गणगौर को पानी पिलाने की रस्म भी निभाई जा रही है। घरों की छतों पर मिट्टी के पालसिए में गणगौर पूजन का क्रम चल रहा है।

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घर-घर गणगौर पूजन, गूंज रहे गीत, घूम रहा घुड़ला

घर-घर गणगौर पूजन, गूंज रहे गीत, घूम रहा घुड़ला

धुलंडी के दिन से प्रारंभ हुआ गणगौर पूजन उत्सव परवान पर है। घर-घर में गणगौर पूजन चल रहा है। बालिकाएं व महिलाएं गणगौर प्रतिमाओं के आगे पारंपरिक गणगौरी गीतों का गायन कर गणगौर प्रतिमाओं के विविध व्यंजनों का भोग अर्पित कर रही है। गणगौर को पानी पिलाने की रस्म भी निभाई जा रही है। घरों की छतों पर मिट्टी के पालसिए में गणगौर पूजन का क्रम चल रहा है। गवर पूज रही बालिकाएं शाम को दांतणियां देने की रस्म निभा रही है। गणगौर पूजन कर रही बालिकाएं देर शाम बाद घुड्ला घुमाने की परंपरा का निर्वहन कर रही है। मिट्टी से बने घुड़ले में मिट्टी डालकर व मिट्टी पर जलता हुआ दीपक रखकर घुड़ले के साथ घर परिवार और मोहल्ले के घरों पर गीतों का गायन करते हुए पहुंच रही है। घर परिवार के सदस्यों की मंगल कामनाएं गीत के माध्यम से कर रही है। शगुन रूप में लोग बालिकाओं को नगद राशि भेंट कर रहे है।

‘पागडल्यां रा पेच ईसरजी ढ़ीला-ढ़ीला लागै’

गणगौर पूजन उत्सव में घरों और गली-मोहल्लों में पारंपरिक गणगौरी गीतों के गायन का क्रम भी चल रहा है। बालिकाएं व महिलाएं गवर के बासा देने की रस्म के दौरान गणगौरी गीत और नृत्यों की प्रस्तुतियां दे रही है। वहीं पुरुषों की गायन मंडलियों की ओर से मोहल्लों में गणगौर प्रतिमाओं के आगे पारंपरिक गणगौरी गीतों का गायन किया जा रहा है। इस दौरान ‘पागडल्यां रा पेच ईसरजी’, ‘खेलण दो गणगौर’, ‘थोरा वचन ए सुहावणा’, ‘म्हारी चांद गवरजा’, ‘गवरल रुडो ऐ नजारो तीखो नैणों रो’ सहित पारंपरिक गीतों का गायन कर रहे है।