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आज देश में सोशल, साम्यवाद, सामाजिक राजनीति और सामाजिक न्याय की आवश्यकता

आज देश में सोशल, साम्यवाद, सामाजिक राजनीति और सामाजिक न्याय की आवश्यकता

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आज देश में सोशल, साम्यवाद, सामाजिक राजनीति और सामाजिक न्याय की आवश्यकता

आज देश में सोशल, साम्यवाद, सामाजिक राजनीति और सामाजिक न्याय की आवश्यकता

-अरुण मोदी, चिंतक और विश्लेषक

आज देश में पूॅंजीवादी राजनीति ही ताकतवर होती जा रही है जबकि देश को आवश्यकता है सोशल और सामाजिक राजनीति की । देश में सबसे बड़ी विचारधारा, कांग्रेस विचारधारा थी, कांग्रेस विचारधारा है और कांग्रेस विचारधारा रहेगी । कांग्रेस के अंदर जो घमासान चल रहा है, वह युवा वर्सेज सीनियर का है । सीनियर लोगों का सम्मान तो होना चाहिए युवाओं द्वारा एंव इसको कहते है अनुशासन वाली राजनीति । मौका युवाओं को ही देना चाहिए । सोशल और सामाजिक राजनीति में यह नियम है कि आप जनता के बीच में जाओगे, जमीन पर काम करोगे, समाज के बीच में सेवा करोगे, तभी समाज का विकास एंव देश का विकास कर सकोगे । इस पॅंूजीवादी राजनीति को सोशल और सामाजिक राजनीति ही धवस्त कर सकती है क्योंकि हमारा देश गरीब विकासशील देश है । तो इसके लिए युवाओं को आगे आना चाहिए । युवा टीम तैयार हो कर भविष्य में संघर्ष करने जा रही है, यह समय की मांग है कि ऐसी राजनीति चाहे विपक्ष में ही क्यों ना हो, वह अपनी सामाजिक राजनैतिक की भावना पूर्ण रूप से निभायेगा क्योंकि वो सामाजिक, संविधान की, लोकतंत्र की पहचान को समझते है एंव वे ही इसे तोड़ पायेंगे क्योंकि हमारा देश गरीब विकासशील देश है ।


आज देश को जो जमीन की राजनीति कर सकता हो, जमीन को पहचान सकता हो, जो जनता के बीच जा कर जनता की आवाज, उनकी परेशानियॉं सुन सकता हो कि यहॉं पर ये दर्द है, इसकी आवश्यकता है । वरना ये जो पॅंूजीवादी, कार्पोरेट वाली राजनीति चल रही है, ये ईस्ट इण्डिया कंपनी की तरह ही 20-30 कॉर्पोरेट की एक कंपनी बन जायेगी, जो उस गुलामी से भी ज्यादा ताकतवर गुलामी होगी ।


आज किसी भी राजनैतिक दल और नेता को यदि जिंदा रहना है तो उसे जमीनी राजनीति की आवश्यकता है, संसद से बाहर निकल कर सड़को पर आ के कार्य करना पड़ेगा । सत्ता से मोह रखने वाला कभी भी देश को विकासशील से विकसित नहीं कर सकता । आपको नेता बनना है, सत्ता से मोह नहीं रखना है, जैसे महात्मा गॉंधी थे । तभी आप जो गुलाम बनने जा रहे हो, उससे बच सकते है, वरना नहीं बच सकते । इस प्रकार से जो सत्ता और संगठन बनते है, उनमें सामंजस्य होना चाहिए, विचारधारा के कोई उसूलों को नहीं तोड़ा जाये, चाहे सत्ता जाये तो जाये ।
आज देश में सोशल एंव साम्यवाद राजनीति की आवश्यकता है क्योंकि हमारा देश विकासशील गरीब भारत देश है । यहॉं पर ज्यादा मैजोरिटी ऐसी जनता की है, जो एक नई विचारधारा की तरफ डायवर्ट होगी । पॅंूजीवादी राजनीति को खत्म करने के लिए साम्यवादी, सोशल और सामाजिक न्याय विचारधारा वाली ही सरकार देश में आनी चाहिए । जो सत्ता मोह से हटकर जनता एंव देश विकास की राजनीति कर सकता हो । उसका ही आने वाले समय में भविष्य रहेगा, बाकि सब समाप्त हो जायेंगे । यहॉं फिर सवाल है कि हमारा देश एक गरीब विकासशील देश है, कोई माने या ना माने । यानि गरीब शब्द ही मिट जायेगा । वैसे गरीब शब्द राजनैतिक पार्टियों के लिए एक राजनैतिक मुद्दा है, जिसके लिए जनता को आगे आना चाहिए ।

जो भी राजनैतिक पार्टियॉं मुफ्त अनाज या अन्य घोषणाएं कर रही है, वह इससेजनता का एंव देश का विकास रोक देगी । ये आदमी को मुफ्तखोर बना के गुलाम बना रही है । जनता को कोई भी सरकारी मुफ्त घोषणा को नहीं अपनाना चाहिए, चाहे मुफ्त में डाम ही क्यों ना मिल रहा हो । इससे ये पॅंूजीवादी राजनीति खत्म होगी एंव हम गुलामी से दूर हटेंगे । युवाओं का कर्तव्य बनता है कि देश डूब रहा है क्योंकि लोकतंत्र एंव संविधान बचाने के लिए विपक्ष नहीं है एंव लर्नेड युवा जो इस विचारधारा से जुड़े हुए है, वो एक नया संगठन बना सकते है या देश में सबसे बड़े राजनैतिक दल में जा कर जिसकी सोच की भूमिका में देश व जनता की सेवा हो, वो ही लर्नेड युवा देश का भविष्य तय करेंगे एंव आज की जो पूॅंजीवादी राजनीति चल रही है, उसको खत्म कर सकते है ।

जो जमीन पर आ कर के काम करेगा, वो ही जनता एंव देश का भला करेगा, उसी के साथ ही जनता आयेगी, उसके साथ ही जनता के दर्द होंगे । सोशल राजनीति के लिए आदमी को आत्मत्याग करना पड़ता है, पद की अपेक्षा नहीं करनी होती है । सोशल पॉलिटिक्स का मतलब है सोशल सर्विस, सामाजिक न्याय, जिससे देश का उत्थान हो, समाज का उत्थान हो, व्यक्ति का उत्थान हो बिना भेदभाव के एंव ये आज देश की आवश्यकता है क्योंकि पॅंूजीवादी राजनीति ने देश पर कब्जा कर लिया है ।