
देख तमाशा लोरां का, कुर्सियों माथै चढ़ कर बैठा, शासन फाफा फूलों का...
बीकानेर होली के अवसर पर आयोजित होने वाली रम्मतों का आगाज गुरुवार को नत्थूसर गेट के अंदर स्वांग मेहरी रम्मत फक्कड़दाता के मंचन से हुआ। रम्मत की शुरूआत भगवान गणेश स्वरूप के अखाड़े में पहुंचने के साथ हुई। कलाकारों और उपस्थित शहरवासियों ने 'आयो रे भोळो गणेशियो, दूध दही सूं नहायो रे भोळो गणेशियोÓ स्तुती का सामूहिक रूप से गायन किया। रम्मत मंचन में जाट-जाटणी और बोहरा-बोहरी स्वांग पात्रों ने हास्य रस बिखेरा और अच्छे जमाने की कामाना की।
रम्मत के पारम्परिक गीत 'सावण लूम्ब रयो घर आव, 'एेवड़, 'म्हारो चाचक बोहरो का गायन किया तथा पात्रों ने नृत्यों की प्रस्ततियां दी। बच्चों ने 'खाकी स्वांग पात्रों के माध्यम से नृत्य किए। इसके बाद लावणी, चौमासा और ख्याल गीतों का गायन हुआ। रम्मत के ख्याल गीत में 'देख तमाशा लोरां का कुर्सियों माथै चढ़ कर बैठा, शासन फाफा फूलों का, '५६ इंच रो सीनो दिखायो के माध्यम से समसामयिक विषयों, राजनीति और शासन पर कटाक्ष किए गए। चौमासा गीत 'हो पडू पियाजी रे आज पईयां परदेशों मति छोड़ जइयाÓ तथा लावणी गीत 'कैवूं तो क्या शोभा हद भारीÓ का गायन किया गया। देर शाम बाद शुरू हुई इस रम्मत का मंचन मध्यरात्री बाद तक चला।
इन्होंने निभाई भूमिका
रम्मत में पंडित जुगल किशोर ओझा, द्वारका महाराज, पंडित प्रहलाद ओझा, मदन व्यास, कैलाश पुरोहित, कन्हैयालाल रंगा, राामरतन, भोला महाराज, महेश पुरोहित, गोपाल जोशी, आशीष, पवन, रमेश, कैलाश ओझा, सतीश किराड़ू, गजानंद आदि ने भूमिकाएं निभाई।
Published on:
15 Mar 2019 11:19 am
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