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आओ खो जाएं सितारों में कही…और सदा के लिए अनंत में विलीन हो गए स्वर कोकिला के सुर

बीकानेर के कई संगीतकारों की धुनों पर लता मंगेशकर ने दी अपनी कर्णप्रिय आवाजपाकीजा में गुलाम मोहम्मद ने दिया संगीत फिल्म के गीत और संगीत दशकों बाद भी सदाबहार

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आओ खो जाएं सितारों में कही...और सदा के लिए अनंत में विलीन हो गए स्वर कोकिला के सुर

आओ खो जाएं सितारों में कही...और सदा के लिए अनंत में विलीन हो गए स्वर कोकिला के सुर

बीकानेर. हिन्दी फिल्म जगत से बीकानेर का दशकों पुराना रिश्ता है। यहां के गीतकारों, संगीतकारों ने अपनी कला -प्रतिभा की अमिट छाप छोड़ी है। गीतकार भरत व्यास के लिखे गीत आज दशकों बाद भी हर किसी की जुबान पर हैं। वहीं 70 के दशक में रिलीज हुई फिल्म ‘पाकीजा’ के गीतों को भला कौन भूल सकता है। इस फिल्म के गीत और संगीत को लोग आज भी दिल की गहराईयों से गुनगुनाते रहते हैं। बीकानेर के कई संगीतकारों ने फिल्म जगत में अपनी धुनों की मिठास घोली है। कई ख्यातिलब्ध गायक कलाकारों ने इन मधुर धुनों पर अपनी आवाज दी और गीत-संगीत को ऊंचाईयां प्रदान की। भारत रत्न और स्वर कोकिला लता मंगेशकर भी बीकानेर के संगीतकारों की कला प्रतिभा से प्रभावित रहीं। उन्होंने गुलाम मोहम्मद, चांद परदेशी, अली-गनी के संगीत से सजी मधुर धुनों पर गीत और भजन में कई बार अपनी आवाज दी। इनमें पाकीजा के गीतों ने सर्वाधिक लोकप्रियता हासिल की।

राजस्थान के प्रति था सम्मान

संगीतकार गुलाम मोहम्मद के पुत्र मुमताज अहमद बताते हैं कि लता मंगेशकर के दिल में राजस्थान को लेकर गहरा सम्मान था। वे कहती थीं राजस्थान का गाना-बजाना विशेष है। वे राजस्थान को बहुत मानती थी। फिल्म परदेश, कुंदन, अंबर सहित कई फिल्मों में संगीत गुलाम मोहम्मद का था। गीतों को आवाज लता मंगेशकर ने दी। पाकीजा में गुलाम मोहम्मद के संगीत पर गीतों को लता मंगेशकर ने जैसी कर्णप्रिय आवाज दी, दशकों बाद आज भी इस फिल्म के गीत हर जुबान पर वैसी ही शिद्दत के साथ मौजूद हैं।

चंदा रे मोरी बतिया ले जा

संगीतकार चांद परेदशी के पुत्र फतेह चांद परदेशी का कहना है कि चांद परदेशी के संगीत से सजी फिल्म बंजारन और एक बार चले आओ में गीतों को स्वर लता मंगेशकर ने दिया। बंजारन के निर्माता भी बीकानेर के अब्दुल सत्तार थे। चंदा रे मोरी बतिया ले जा, साजन को पहुंचा दे रे गीत प्रसिद्ध रहा। दोनों फिल्मों में लता मंगेशकर ने चार गीतों में अपनी आवाज दी।

दिल में रह गई तमन्ना

संगीतकार अली-गनी के संगीत से सजे एक भजन ‘दाता सुनले’ में स्वर लता मंगेशकर के थे। संगीतकार अली का कहना है कि यह भजन रिलीज नहीं हो पाया। इसकी रेकॉर्डिंग स्वरलता स्टूडियों में हुई थी। संगीतकार अली का कहना है कि इस भजन की रेकॉर्डिंग के दौरान उन्होंने लता मंगेशकर के समक्ष मांड राग सुनाने की बात कही। उन्होंने घर आने और सुनाने के लिए कहा। लेकिन घर पहुंचकर उनको मांड सुनाने की यह तमन्ना पूरी नहीं हो सकी। गौरतलब है कि पाकीजा का गीत ‘ठाड़े रहिओ ओ बांके यार’ की गायन शैली भी राग मांड पर ही आधारित है।

सिर पर रखा हाथ

गायक कलाकार रफीक सागर ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान लता मंगेशकर से मुलाकात कर आशीर्वाद प्राप्त किया। रफीक सागर के अनुसार लता मंगेशकर ने उनके सिर पर हाथ रखा व आर्शीवाद दिया। साथ ही कहा बढि़या गाओ और खूब गाने का अभ्यास करो। रफीक सागर के अनुसार लता मंगेशकर बहुत सरल और सहज स्वभाव की थीं। पहली मुलाकात में एेसा नहीं लगा कि मैं पहली बार उनसे मिल रहा हूं।