
केन्द्रीय मंत्री बोले, बीकानेर को बनाएंगे माइनिंग व सिरेमिक हब
बीकानेर. केन्द्र सरकार में संसदीय कार्य, भारी उद्योग और लोक उपक्रम राज्यमंत्री बनने के बाद अर्जुनराम मेघवाल शनिवार को पहली बार बीकानेर पहुंचे। सुबह ७ बजे मेघवाल का रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही समर्थकों ने माला पहनाकर स्वागत किया। मेघवाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारी उद्योग और लोक उपक्रम मंत्रालय मिला है, उसमें रोजगार सृजन की भरपूर संभावना है। इसका फायदा राजस्थान और खासकर बीकानेर को भी मिलेगा। उन्होंने प्रदेश को सोलर हब और बीकानेर को माइनिंग व सिरेमिक हब बनान को अपनी प्राथमिकता बताया।
लोकसभा चुनाव के दौरान कुछ स्थानीय और प्रदेश स्तर के भाजपा नेताओं की ओर से उन्हें हराने के लिए प्रयास करने के सवाल पर मेघवाल ने कहा कि १४ जून को चुनावों को लेकर संगठन की अहम बैठक है। कोर कमेटी सदस्य के नाते वे भी उसमें शामिल होंगे। संगठन के संज्ञान में सभी मामले हैं।
संभावनाओं से भरा मंत्रालय
मंत्रालय के अधीन 'फेम स्कीम चल रही है। इसका अर्थ फास्टर, एडप्शन, मैन्युफैक्चरिंग और हाईब्रिड इलेक्ट्रिकल है। इसमें कार्बन एम्बिशन कम करने के लिए कई तरह की पॉलिसी शामिल की गई हैं। अभी इसका दस हजार करोड़ रुपए का बजट है। इलेक्ट्रिक व्हीकल का डिजाइन क्या होगा, कई तरह की सोसायटी और पॉलिसी बनाने के लिए बोर्ड भी है। पर्यावरण और सुरक्षा के लिहाज से इलेक्ट्रिक वाहन के सुझाव मिलते हैं, उन पर विचार होता है। यह संभावनाओं से भरा मंत्रालय है।
डिटेल में जाने का प्रयास करेंगे
मंत्री ने कहा कि पीएसयू लगातर अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत कर रहे हैं। बीकानेर में हमने सोलर, माइनिंग और सिरेमिक हब के बारे में सोचा है। बीकानेर और आसपास के क्षेत्र में रोजगार सृजन प्राथमिकता में रहेगा। भारत पेट्रोलियम मंत्रालय में एक पीएसयू है, जो लूणकरनसर में प्रस्तावित ऑयल रिजर्व डिपो के कार्य को देख रहा है। उससे भी वार्ता करेंगे। अभी मंत्रालय मिला है, इसमें डिटेल में जाकर काम करूंगा।
गैस पाइप लाइन का विकल्प भी
बीकानेर में सेरेमिक उद्योग के लिए गैस पाइप लाइन की मांग लम्बे समय से चल रही है। कुछ उद्योगपतियों का कहना है कि इसमें इलेक्ट्रिक ऊर्जा का उपयोग भी अब संभव हो गया है। फिर भी गैस पाइप लाइन के मामले पर नए सिरे से प्रयास किए जाएंगे।
प्रदेश के हालात के लिए गहलोत जिम्मेदार
मेघवाल ने 'राजस्थान पत्रिकाÓ के सवाल पर कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद जिस तरह से नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही है, उसका नुकसान जनता को उठाना पड़ रहा है। महिलाओं पर अपराध बढ़े हैं, कानून और प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई है।
इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पूरी तरह जिम्मेदार हैं। जिस तरह चुनाव जीतने का श्रेय अगुवा नेता लेते हैं, उसी तरह हार की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होती है। कांग्रेस की समस्या यही है कि हार की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है।
Published on:
09 Jun 2019 10:39 am
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