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शांति का संदेश देते शिलालेख, विद्यार्थियों में बढ़ा रहे आपसी समझ

शांति और आपसी समझ का अंतरराष्ट्रीय दिवस आज  

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एमजीएसयू परिसर में ​िस्थत शांति और अहिंसा पार्क।

एमजीएसयू परिसर में ​िस्थत शांति और अहिंसा पार्क।

यहां हर शिला शांति और सद् भाव का संदेश दे रही है। ये शिलाएं न केवल आज की भागमभाग वाली जिंदगी एवं सोशल मीडिया से अति प्रभावित युवा पीढ़ी में सकारात्मक भाव जगा रही हैं, बल्कि उनमें आपसी समझ विकसित कर आत्मविश्वास भी बढ़ा रही हैं। विद्यार्थियों को शांत वातावरण मुहैया करवाने और तनाव से दूर रखने के उद्देश्य से महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू) में शांति और अहिंसा पार्क की स्थापना की गई है। यहां पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी शांति एवं अहिंसा का पाठ पढ़ने आते हैं। बीकानेर में युवा पीढ़ी और आम लोगों को सामाजिक एवं राष्ट्रीय जीवन में शांति एवं अहिंसा का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण प्रेरणास्पद स्मारक हैं। यह पार्क विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक भाव लाने के साथ-साथ प्रेरणा का संचार तो करता ही है, साथ ही उन्हें सेवा भाव के लिए भी प्रेरित करता है। विश्वविद्यालय की ओर से यह प्रयास किया गया है कि विद्यार्थियों को परिसर में एक ऐसा स्थान मिले, जहां वे दो पल सुकून और शांति के हासिल कर सकें। यहां पर महात्मा गांधी के शांति विचारों को शिलालेख पर उकेरा हुआ है।

हर शिला कुुछ कहती है...

पार्क में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा लगाकर उनके चारों तरफ उनकी संपूर्ण जीवन यात्रा एवं संदेशों के शिलालेख तैयार करवा कर लगाए गए हैं। इसी परिसर में मन को शांत करने के लिए विशेष रूप से ध्यान केंद्र एवं प्रार्थना एवं सभा स्थल तैयार किया गया है। यह एक ऐसा केंद्र है, जहां प्रवेश लेते ही युवा मन में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। परिसर में ही विवेकानंद पार्क भी विकसित किया गया है। जहां युवाओं को प्रेरणा देने के लिए स्वामीजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से संबंधित संपूर्ण चरित्र एवं जीवन यात्रा काे शिलालेख के रूप में प्रदर्शित किया गया है। यहां पर भी शांति के लिए एक बड़ा ध्यान केंद्र बनाया गया है। एमजीएसयू के अतिरिक्त रजिस्ट्रार डॉ. बिट्ठल बिस्सा बताते हैं, शांति एवं अहिंसा सारी मानवता के स्वस्थ सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक विकास की बुनियादी कसौटी मानी जाती रही है और उसके सबसे बड़े प्रतीक पुरुष महात्मा गांधी की प्रतिमा विश्वविद्यालय के वृत्ताकार शांति अहिंसा पार्क के बिल्कुल मध्य में स्थापित है। उसके चतुर्दिक मध्य वृत्त में बने पठनीय तिरछे स्तंभों पर आधुनिक भारतीय राष्ट्र निर्माण एवं भारतीय स्वतंत्रता के राष्ट्रीय आन्दोलन के शीर्ष नायक महात्मा गांधी के जीवन एवं योगदान का वृत्तांत है।

----टॉपिक एक्सपर्ट : डॉ. गौरव बिस्सा, एसोसिएट प्रोफ़ेसर (मैनेजमेंट), इंजीनियरिंग कॉलेज, बीकानेर

शान्ति और आपसी समझ का स्कूल है बीकानेर

बीकानेर, सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा परिवार है। जिसमें प्रेम, सोहार्द्र और शान्ति का भाव झलकता है। स्थापना से लेकर आज तक बीकानेर में किसी तरह के सांप्रदायिक विद्वेष या जातीय कटुता की घटना न देखकर ही शायद पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने कहा था-ईश्वर करे, सारा भारत ही बीकानेर बन जाए...। यहां की पारस्परिक समझ इस स्तर की है कि यहां के नरेश ने अपनी पुत्री के विवाह की तारीख इसलिए परिवर्तित कर दी, क्योंकि उसी दिन मोहर्रम थी। क्या समूचे राष्ट्र में ऐसी परस्पर समझ का उदाहरण मिल सकता है? आज के दिन को संयुक्त राष्ट्र संघ ने शान्ति और समझ के दिवस के रूप में स्वीकार किया है। यहा पाटों पर बैठकर चर्चा करते हुए व्यक्ति सामाजिक पुलिस का काम करते हैं। पाटा संस्कृति या चर्चा सिर्फ रात्रिकालीन गपशप नहीं, बल्कि सुख शान्ति और सद्भाव की स्कूल है। ये आपसी संपर्क को सुदृढ़ करने का, एक दूसरे के दुःख सुख में साथी बनने का और मन के भावों और गुबारों को निकालने का एक मंच है। मनोरोग विशेषज्ञ के अनुसार यही तो वेंटिलेशन है। पाटा संस्कृति की तर्ज पर स्पेन में अल्फ्रेस्को चैट होती है। इसका अर्थ है, खुली हवा में वार्तालाप जिसमें मोबाइल वर्जित है। स्पेन में शाम को लोग पूरे पडौस के साथ बैठते हैं और आपसी विचार विनिमय कर घंटों बातें करते हैं। इस कारण वहां के लोगों का मानसिक स्वास्थ्य अच्छा है। स्पेन के लोगों ने यूनेस्को से यह आग्रह किया है कि इस सदियों पुरानी परम्परा को वर्ल्ड हेरिटेज घोषित किया जाए। क्या पाटा संस्कृति भी वर्ल्ड हेरिटेज नहीं बननी चाहिए? पाटा संस्कृति, मिणखायत और परस्पर प्रेम बीकानेर की यूएसपी भी है। ऐसी परम्परा, समझ और ऐसा प्रेम दुनिया में एक मिसाल है।