
मुल्तान की मिट्टी से बने हैं नृसिंह-हिरण्यकश्यप के मुखौटे
विमल छंगाणी
अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का पर्व नृसिंह चतुर्दशी बीकानेर में भगवान नृसिंह का प्राकट्य दिवस के रूप मनाया जाता है। यहां रियासतकाल से इस दिन नृसिंह मंदिरों के आगे नृसिंह-हिरण्यकश्यप के बीच प्रतीकात्मक युद्ध और हिरण्यकश्यप वध की लीला का मंचन होता चला आ रहा है। इस साल लखोटिया चौक में मंदिर के सामने 4 मई को 125 साल से चला आ रहा अनूठा मंचन फिर देखने को मिलेगा। इसमें कलाकार भगवान नृसिंह और हिरण्यकश्यप का स्वरुप धारण करेंगे। मिट्टी-कुट्टी से बने नृसिंह-हिरण्यकश्यप के मुखौटे पहनकर लीला का मंचन करेंगे।
आयोजन से जुड़े चन्द्रशेखर श्रीमाली के अनुसार यह मुखौटे प्राचीन है। इनको धारण कर ही अवतार लीला का मंचन होता है।मंदिर व्यवस्था से जुड़े दिलीप दाधीच के अनुसार यह मुखौटे मुल्तान की मिट्टी से बने है। मुल्तान अब पाकिस्तान में है। रियासतकाल में इन मुखौटों को तैयार किया गया था। इनका वजन डेढ से ढाई किलोग्राम तक है। मुखौटों पर सुनहरी कलम से सुंदर चित्रकारी की हुई है।
थंब के कागज के प्रति अटूट आस्था
नृसिंह अवतार लीला मंचन में भक्त प्रहलाद की भूमिका छोटे बालक निभाते है। नृसिंह व हिरण्यकश्यप की भूमिका मोहल्ले के कलाकार निभाते है। नृसिंह चतुर्दशी के दिन मंदिर परिसर में बांस की लकड़ी, कागज से प्रतीकात्मक थंब बनाए जाते है। इसे स्थानीय भाषा में कोठी भी कहा जाता है। भगवान नृसिंह इसी कोठी को फाडकर बाहर निकलते है। इसके कागज के एक छोटे टुकड़े को प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं में होड मची रहती है। लोग कागज को घर ले जाते है और संभालकर रखते है। मान्यता है कि इससे भगवान नृसिंह का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इन स्थानों पर भी मंचन
डागा चौक, लालाणी व्यास चौक, दुजारी गली, नत्थूसर गेट, दम्माणी चौक, गोगागेट के बाहर नृसिंह मंदिरों के आगे नृसिंह-हिरण्यकश्यप लीला का मंचन होता है।
Published on:
03 May 2023 08:59 pm
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