
हमारे यहां एग्रो-इको व रुरल टूरिज्म का कोम्बो
बीकानेर. रेगिस्तानी इलाके में लहलहाती फसलें, लंबे खजूर के पेड़, ऊंटों के टोले और सड़क किनारे दूर-दूर तक लगे सोलर पैनल...यह नजारा बीकानेर सहित आसपास के क्षेत्र में देखने को मिलता है। सड़क से गुजरने वाले वाहन इनको देख फोटो खिंचवाने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसे तो शहर में कई पर्यटक स्थल मौजूद हैं, लेकिन यहां एग्रो-इको व रुरल टूरिज्म में भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं। जानकारों के अनुसार प्रदेश में बीकानेर इकलौता ऐसा जिला है जहां एग्रो, एनिमल, इको और रुरल टूरिज्म का कोम्बो मौजूद है। कृषि से जुड़े संस्थानों के अलावा राष्ट्रीय ऊष्ट्र और अश्व अनुसंधान केंद्र की ओर से पर्यटन को पंख लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
तैयार कर सकते हैं एग्रो-इको टूरिज्म मॉडल
राजुवास के प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. राजेश कुमार धूडिया ने बताया कि बीकानेर में कृषि विवि के अलावा वेटरनरी विवि एवं आईसीएआर से सम्बद्ध संस्थान भी स्थित हैं। उष्ट्र अनुसन्धान केंद्र भी पर्यटन के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इन सभी को पर्यटन सर्किट में शामिल करके एग्रो-इको टूरिज्म मॉडल तैयार किया जा सकता है। राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में स्थित संविधान पार्क, सार्दुल सदन, विजय भवन जैसी हैरिटेज इमारतें भी हैं। पशु चिकित्सालय में पशु, पक्षियों और वन्य जीवों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।
हमारा पर्यावरण ही हमारी ताकत
पर्यटन के हिसाब से कृषि क्षेत्र भी काफी महत्वपूर्ण है। पर्यटकों को यहां के कृषि पर्यटन से भी रूबरू करवाने की जरूरत है। यहां का पर्यावरण सबसे अलग है। काली-पाली आंधी, बारिश, टीलों के नेचुरल व्यू अलग ही अनुभूति देते हैं। पिछले कुछ समय से एग्रो टूरिज्म बढ़ भी रहा है। उम्मीद है आने वाले समय में इस तरफ रुझान और बढ़ेगा। यह रेगिस्तान के लिए आय का एक अच्छा स्रोत हो सकता है। इसको लेकर पर्यटन विभाग को पहल करने की आवश्यकता है।
-डॉ. पीएस शेखावत, निदेशक, अनुसंधान, स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्विद्यालय
इन पर विचार से नवाचार
-पर्यटकों के लिए फार्म टूर
-फार्म-टू टेबल अनुभव
-कार्यशालाओं और प्रदर्शनी का आयोजन
-एग्री टूरिज्म आवास- डेजर्ट इकोलॉजी विजिट
- विलेज सफारी- देसी जायका
Published on:
11 Mar 2023 08:57 pm
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