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सकारात्मक पहल: प्राचीन कुएं के जीर्णोद्धार को जुटे लोग, चार लाख रुपए एकत्र कर शुरू की मरम्मत

नत्थुसर बास में पुराने कुएं का मूल स्वरूप लौटाने की कवायद  

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नत्थूसर बास कुआं पर चल रहा निर्माण कार्य

सकारात्मक पहल: प्राचीन कुएं के जीर्णोद्धार को जुटे लोग, चार लाख रुपए एकत्र कर शुरू की मरम्मत

शहर में वैसे तो पचास से अधिक प्राचीन सार्वजनिक कुएं हैं, लेकिन सभी जीर्णशीर्ण हालत में हैं। आस-पास अतिक्रमण हो गए हैं। कुओं की सार-संभाल नहीं होने से यह प्राचीन विरासत समाप्त होने की कगार पर है। ऐसे में शहर के नत्थुसर बास के लोगों ने अपने क्षेत्र के एक प्राचीन कुएं का जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया है। उन्होंने मोहल्ले के लोगों से चार लाख रुपए एकत्र कर नत्थुसर बास कुएं की मरम्मत का कार्य शुरू किया है। आर्थिक सहयोग के साथ मोहल्ले के लोग मरम्मत कार्य में सहयोग करने भी आते हैं।

नत्थुसर बास के आस-पास के क्षेत्र और मालियों के मोहल्ले में इस प्राचीन कुएं के पानी का पांच दशक पहले तक उपयोग होता था। क्षेत्र के 75 वर्षीय सोहन नाथ ने बताया कि करीब 300 साल पहले रियासतकाल के दौरान नागौर के नथानी परिवार ने आमजन की प्यास बुझाने के लिए इस कुएं का निर्माण करवाया था। साठ के दशक में जलदाय विभाग की ओर से पाइप लाइन से घरों तक पानी पहुंचा दिया गया। इसके बाद लोगों ने कुएं से पानी लेने आना बंद कर दिया। देखरेख के अभाव में आस-पास कचरा जमा हो गया। कुआं भी धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लग गया। इस मोहल्ले की कुआं ही पहचान है। यह प्राचीन धरोहर अब अगली पीढ़ी को पानी के महत्व की सीख भी देती है। ऐसे में सभी ने मिलकर बिना किसी सरकारी मदद के इसे संरक्षित करने का बीड़ा उठाया है।

प्रवासी अब भी आते हैं देखने

सालों पहले नत्थुसर बास छोड़कर महानगरों में जाकर बसे कई परिवारों के सदस्यों का जब भी बीकानेर आना होता है, इस कुएं को देखने आते हैं। उनके अतीत के पन्ने और यादें इससे जुड़ी हैं। कुएं का उपयोग नहीं होने से इसके चबूतरे के पत्थर उखड़ गए हैं। इस पर बनी छतरी व सीढि़यां आदि भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिनकी अब मरम्मत कराई जा रही है।

धार्मिक आस्था व सामाजिक आयोजन

एडवोकेट सुनील सांखला ने बताया यह प्राचीन कुएं कई पीढियों के धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक आयोजनों के साक्षी रहे हैं। जब जीर्णोद्धार की बात चली, तो हर कोई सामर्थ्य के अनुसार सहयोग के लिए आगे आया है। प्राचीन स्वरूप को स्थापित रखने की कोशिश की जा रही है। फिर से यहां पर गणगौर को पानी पिलाने के साथ अन्य धार्मिक, सामाजिक आयोजन किए जा सकेंगे। पास िस्थत सरकारी स्कूल के लिए सह शैक्षिक गतिविधियों के मंच के रूप में भी काम आएगा।

पुस्तकालय बनाने की योजना

नवीनीकरण के काम में करीब तीन से चार लाख रुपए खर्च होने की संभावना है। इस कार्य से जुड़े शक्ति सिंह कच्छावा ने बताया कि कुएं के मूल स्वरूप में आने से यहां पुस्तकालय, वाचनालय, रीडिंग लाइब्रेरी जैसी गतिविधियां सबकी सहमति से शुरू की जा सकती हैं। यह कुआं सर्वसमाज की धरोहर तथा इस क्षेत्र की पहचान है। इससे प्रेरणा लेकर शहर के अन्य कुओं का भी आस-पास बसे लोगों को जीर्णोद्धार कराने की प्रेरणा मिलेगी।