
राइनो वायरस का घर-घर वार, रोजाना अस्पताल पहुंच रहे 700 बीमार
बीकानेर. मौसम बदलने के साथ सर्दी की चपेट में आकर जुकाम-बुखार होना सामान्य घटना माना जाता है। परन्तु इस बार दिन और रात के पारे में ज्यादा अंतर रहने से सर्दी के साथ सक्रिय हुआ राइनो वायरस ज्यादा ही आक्रामक दिख रहा है। घर-घर में खांसी, जुकाम और बुखार ने परिवार के सदस्यों को जकड़ रखा है। एक सदस्य स्वस्थ होता है, तो दूसरा चपेट में आ जाता है। हालांकि राइनो वायरस कॉमन कोल्ड वायरस है। इसकी चपेट में आए करीब 700 मरीज रोजाना पीबीएम अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें से करीब दस फीसदी ऐसे मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है, जो अन्य बीमारियों से भी ग्रसित होते हैं।
राहत भी और खतरे की आहट भी
चिकित्सकों के मुताबिक, राहत की बात यह है कि यह वायरस पांच दिन ही शरीर में ज्यादा सक्रिय रह पाता है। सामान्य तौर पर दवाइयां देने के एक-दो दिन में ही मरीज को राहत महसूस होने लगती है। खास कर गर्म-ठंडे के खान-पान का ध्यान रख कर और सर्दी से बचाव कर इस वायरस से बचा जा सकता है। दूसरा गंभीरता वाला पक्ष यह भी सामने आया है कि इसकी चपेट में आ रहे मरीजों में करीब 50 फीसदी बच्चे हैं। निमोनिया भी होने की आशंका रहती है, जिसके होने पर मरीज को भर्ती तक करना पड़ता है।
क्या हैं लक्षण
चिकित्सकों के मुताबिक, अगर जुकाम होता है, तो तत्काल उपचार लेना चाहिए। इसके बढ़ने से बुखार की चपेट में आ सकते हैं। चिड़चिड़ापन और खांसी के साथ श्वास लेने में तकलीफ भी हो सकती है। बच्चों के लिए ज्यादा परेशानी वाला होता है। आंखों में पानी आना और नाक बहना राइनो वायरस की चपेट में आने के लक्षण हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, नवंबर से जनवरी तक तीन महीने इसका असर ज्यादा रहता है।
70 फीसदी वायरस जनित मरीज
पीबीएम अस्पताल के मेडिसिन और बच्चा विभाग के आउटडोर में रोजाना करीब एक हजार मरीज आते हैं। इनमें से 70 फीसदी के करीब यानी करीब सात सौ मरीज सर्दी-जुकाम अर्थात राइनो वायरस से पीडि़त होते हैं। यह वायरस बच्चों के साथ बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक है। मेडिसिन विभाग के आउटडोर में प्रतिदिन पांच सौ मरीजों का पंजीकरण हाे रहा है। इसमें से साढ़े तीन सौ मरीज तो इसी वायरस के आ रहे हैं। बच्चा अस्पताल में भी पांच सौ से छह सौ मरीजों का पंजीकरण हो रहा है। इसमें से साढ़े तीन सौ के आसपास सर्दी-जुकाम से पीडि़त बच्चे होते हैं।
इन बीमारियों के मरीज रहें सतर्क
जो व्यक्ति मधुमेह, गुर्दा, कैंसर, टीबी, साइनस, फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग आदि से पीडि़त होते हैं, उन पर इस वायरस का खतरा ज्यादा रहता है। इस प्रकार के मरीजों को निमोनिया होने की आशंका रहती है। निमोनिया होने पर करीब एक पखवाड़े तक इलाज लेना पड़ता है। जबकि सामान्य मरीज को पांच-सात दिन का उपचार पर्याप्त रहता है।
सावधानी आवश्यक
राइनो वायरस कॉमन कोल्ड वायरस है। मौसम बदलते ही लोग इसकी चपेट में आने शुरू हो जाते हैं। इसके बचाव के लिए सर्दी में पूरे कपड़े पहनने चाहिए। ठंडी वस्तुओं का सेवन नहीं करें। गुनगुने पानी का उपयोग सर्वाधिक करें। किसी को जुकाम से आराम नहीं मिल रहा है और हल्का बुखार है, तो चिकित्सक को तुरंत दिखाना चाहिए। ताकि निमोनियो जैसी बीमारी न हो जाए।
- डॉ. सुरेन्द्र कुमार वर्मा, सीनियर प्रोफेसर मेडिसिन विभाग पीबीएम अस्पताल
Published on:
09 Dec 2022 08:05 pm
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