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चीनी में तेजी फिर भी मिठास कम नहीं, दो हजार क्विंटल से अधिक की रोजाना खपत

रसगुल्ला व गुलाब जामुन समेत मिठाइयों में ज्यादा उपयोग

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चीनी में तेजी फिर भी मिठास कम नहीं, दो हजार क्विंटल से अधिक की रोजाना खपत

चीनी में तेजी फिर भी मिठास कम नहीं, दो हजार क्विंटल से अधिक की रोजाना खपत

-बृजमोहन आचार्य

बीकानेर. चीनी के भावों में पिछले महीने के मुकाबले सितम्बर में करीब पांच रुपए प्रति किलो की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। चीनी के भावों में तेजी आने के बावजूद बीकानेर में इसकी खपत की मिठास कम नहीं हुई है।
अभी भी रोजाना दो हजार क्विंटल से अधिक चीनी रोजाना खपत हो रही है। इसकी बड़ी वजह रसगुल्ला, गुलाब जामुन सरीखी मिठाइयों में चीनी का बड़ी मात्रा में उपयोग होना है। रसवाली मिठाई के लिए बीकानेर देशभर में पहचाना जाता है। यही वजह है कि बीकानेर चीनी की खपत में प्रदेश में नम्बर एक पर रहता है।
चीनी के भाव बढऩे के पीछे इसके उत्पादन में आई कमी को माना जा रहा है। गन्ने के भावों में तेजी आने और महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की चीनी उत्पादन इकाइयों में उत्पादन घटने का असर चीनी भावों पर पड़ा है।
व्यापारी बताते है कि पिछले साल लॉकडाउन के दौरान चीनी की कृत्रिम कमी दर्शाकर दुकानदारों ने चीनी को ४५ रुपए प्रति किलो के भाव तक बेचा था। तब मिठाइयों के कारखाने भी बंद थे लेकिन, गली-गुवाड़ के व्यापारियों ने मौके का फायदा उठाया। इसके बाद लॉकडाउन खुलने पर भाव वापस ४० रुपए से नीचे आ गए।


चीनी का निर्यात
भाव बढऩे के एक कारण इसकी विदेश में निर्यात होना भी है। भारत के अलावा अन्य देशों में भी चीनी का निर्यात होने लगा है। गत दो सालों में पचास लाख टन चीनी का निर्यात हो चुका है। जबकि पहले इसका निर्यात नहीं होता था।

थोक में ३९.२५, खुदरा ४४ रुपए
चीनी के भावों की बात करे तो थोक में इसके भाव मंडी में ३८.५० से ३९.२५ रुपए प्रति किलो है। जबकि खुदरा में इसके भाव ४३ से ४४ रुपए प्रति किलोग्राम चल रहे हैं। पैकिंग वाली चीनी के भाव ४६ से ४८ रुपए प्रति किलोग्राम है। जबकि दो माह पहले चीनी के भाव ३६०० रुपए प्रति क्विंटल चल रहे थे।


सर्दी में चीनी की खपत कम, गर्मी में ज्यादा
एक अनुमान के मुताबिक सर्दी में चीना की खपत कम होती है। जबकि गर्मी यह बढ़ जाती है। इसकी वजह यह है कि गर्मी में शीतल पेय पदार्थों का उत्पादन अधिक होने के कारण दस से १५ प्रतिशत तक चीनी की खपत बढ़ जाती है।

महंगी होने के कारण
गन्ने से एथिमनोनोल बनाना।
विदेश में चीनी निर्यात होना।
मिलों में चीनी का मासिक कोटा जारी करना।
गन्ने की दर में हर साल बढ़ोतरी करना।

बीकानेर में सबसे अधिक खपत
बीकानेर मेें चीनी की खपत सबसे अधिक होती है। हालांकि घरेलू खपत जयपुर में ज्यादा होती है। वहां जनसंख्या बीकानेर से अधिक है। मिठाइयों के कारखाने बीकानेर में अधिक होने से सबसे ज्यादा चीनी खपती है। यहां पर प्रतिदिन दो से ढाई हजार क्विंटल चीनी का उपयोग होता है। इसमें ८०० से १००० हजार क्विंटल चीनी की खपत मिठाइयों के कारखानों में और शेष घरेलू खपत है।


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