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अव्यवस्था: चिकित्सा व्यवस्था चरमराई, बढ़ रहा ऑपरेशन का इंतजार

पेट में दर्द आज, ऑपरेशन एक माह बाद सामान्य व आपातकालीन ऑपरेशन कर रहे हैं सीनियर चिकित्सक

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अव्यवस्था: चिकित्सा व्यवस्था चरमराई, बढ़ रहा ऑपरेशन का इंतजार

बीकानेर. लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लगने से पहले प्रदेश स्तर पर चिकित्सा विभाग में किए गए तबादलों ने चिकित्सा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर डाला है। एसपी मेडिकल कॉलेज और संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। कॉलेज एवं अस्पताल से ३२ चिकित्सकों के तबादले किए गए थे, जिनमें से चार चिकित्सकों के निरस्त हुए। शेष चिकित्सकों को यहां से रिलीव कर दिया गया है।
तबादलों का सर्वाधिक असर गायनिक, अस्थि रोग, सर्जरी विभाग और फार्माकॉलॉेजी में दिखाई दे रहा है। सर्जरी विभाग में हालात यह है कि ऑपरेशन के लिए मरीज एक-एक महीने से अधिक समय से इंतजार कर रहे हैं। मरीजों की वेटिंग लिस्ट अभी और बढ़ेगी। वर्तमान में हालात यह है कि किसी मरीज के पेट में पथरी है और वह ऑपरेशन कराना चाहता है तो उसे एक महीने तक इंतजार करना पड़ेगा।

यूनिट में १० से ४२ मरीजों की वेटिंग
सर्जरी विभाग की प्रथम यूनिट प्रभारी डॉ. अशोक परमार के मरीजों की वेटिंग लिस्ट ३५, द्वितीय यूनिट एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सलीम मोहम्मद की ओर से किए जाने वाले मरीजों के ऑपरेशन की वेटिंग लिस्ट ४२ के करीब है। तृतीय यूनिट प्रभारी डॉ. अशोक लूनिया के मरीजों की वेटिंग लिस्ट सात, चतुर्थ यूनिट प्रभारी डॉ. महेन्द्र कुमार जलथानिया के मरीजों की वेटिंग लिस्ट १०-१२, पांचवीं यूनिट प्रभारी डॉ. भूपेन्द्र शर्मा के मरीजों की वेटिंग लिस्ट ३८ है।

दो का तबादला, एक ने छोड़ा
गायनिक विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गायनिक विभाग में कार्यरत डॉ. सुवाराम सैनी का करीब डेढ़-दो साल पहले ही यहां से तबादला हो गया था। अब हाल ही में डॉ. सुमन बुढ़ानिया का तबादला कोटा हो गया है। वहीं एक अन्य वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कमला ने नौकरी छोड़ दी तथा बाड़मेर में खुले नए मेडिकल कॉलेज में ज्वाइन कर लिया है। इसके अलावा अन्य चिकित्सक अवकाश व अन्य कारणों से अवकाश पर होने से परेशानियां बढ़ गई है। पीबीएम जनाना अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक यहां हर साल तकरीबन १८००० प्रसव होते हैं। हर दिन ७०-७२ सामान्य प्रसव और २० से २५ प्रसव ऑपरेशन से करवाए जाते हैं।

अतिरिक्त कार्य कर रहे चिकित्सक
सर्जरी विभाग में हालात यह है कि चिकित्सकों को दिन में ओपीडी में बैठने, रुटीन के ऑपरेशन करने के अलावा रात में इमरजेंसी में भी ऑपरेशन करने आना पड़ रहा है। ऑपरेशन से पूर्व की तैयारियां स्वयं देखनी पड़ रही है। चिकित्सकों को अतिरिक्त कार्य करना पड़ रहा है। एक चिकित्सक ने बताया कि यह रोज का काम है, एक-दो दिन का नहीं। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। अन्यथा मरीजों की वेटिंग दिन-प्रतिदिन बढ़ेगी। वे भी मजबूर है, पहले ज्यादा जरूरी मरीजों का ऑपरेशन करना पड़ता है। सामान्य मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है।


नका हुआ तबादला
सर्जरी विभाग : डॉ. मनोहरलाल दवां, डॉ. नरेश मीणा, डॉ. धर्मवीर जाजड़ा, डॉ. संदीप खड्डा, डॉ. ईश्वरदान चारण।
अस्थि विभाग : डॉ. बीएल चौपड़ा, डॉ. रामप्रकाश लोहिया, डॉ. सुरेन्द्र कुमार चौपड़ा।
शिशु विभाग : डॉ. घनश्याम सिंह सेंगर, डॉ. आरके सोनी, डॉ. मुकेश बेनीवाल।
रेडियो डायग्नोसिस विभाग : डॉ. रिद्धिमा गुप्ता, डॉ. हेमन्त जैन।
क्षय विभाग : डॉ. राजेन्द्र सौगत।

ये तबादले हुए निरस्त
गायनिक : डॉ. मोनिका सोनी।
रेडियो डायग्नोसिस: डॉ. जीएल मीणा।
नेत्र विभाग : नवाब अली खान।
बायोकैमेस्ट्री : डॉ. योगिता सोनी।


फार्माकॉलोजी में केवल दो वरिष्ठ प्रदर्शक
फार्माकॉलोजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. आरपी आचार्य ने रिजाइन दे दिया और चूरू में ज्वाइन कर लिया। एसोसिएट प्रोफेसर का भी हाल ही में तबादला हो गया। ऐसे में वर्तमान में विभाग में केवल दो वरिष्ठ प्रदर्शक पदस्थापित है। विडम्बना है कि विभाग को चलाने के लिए दूसरे विभाग के प्रोफेसर को विभागाध्यक्ष बनाना पड़ा है।

प्रभावित हो रहा है काम
चिकित्सकों की कमी होने के कारण निश्चित रूप से काम प्रभावित हो रहा है। सीनियर चिकित्सकों ने जैसे-तैसे व्यवस्था संभाल रखी है। उम्मीद है कि चुनावों के बाद चिकित्सकों की फिर नियुक्तियां होगी। जरूरी और इमरजेंसी ऑपरेशन टाले नहीं जा रहे हैं। सामान्य ऑपरेशनों में जरूर समय लग रहा है। चिकित्सक अतिरिक्त कार्य कर रहे हैं।
डॉ. आरपी अग्रवाल, प्राचार्य एसपी मेडिकल कॉलेज।