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यहां कृष्ण के साथ हैं राम-सीता, रघुनाथ मंदिर में होती है कृष्ण लीला

करीब 365 साल पुराने इस मंदिर में अष्टधातु से बनी ये प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के लिए आस्था और श्रद्धा का केन्द्र है। यह मंदिर भगवान राम और सीता के साथ कृष्ण की प्रतिमाओं के लिए ही नहीं, राम मंदिर में हर साल होने वाली कृष्ण लीला और भगवान श्री राम की जन्म कुंडली के वाचन के लिए भी प्रसिद्ध है।

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यहां कृष्ण के साथ हैं राम-सीता, रघुनाथ मंदिर में होती है कृष्ण लीला

यहां कृष्ण के साथ हैं राम-सीता, रघुनाथ मंदिर में होती है कृष्ण लीला

मरुनगरी बीकानेर में रियासतकाल में स्थापित हुआ तेलीवाड़ा चौक स्थित श्री रघुनाथ मंदिर न केवल ऐतिहासिक और अनूठा है बल्कि यहां भगवान श्रीराम और माता जानकी के साथ भगवान श्रीकृष्ण भी है। करीब 365 साल पुराने इस मंदिर में अष्टधातु से बनी ये प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के लिए आस्था और श्रद्धा का केन्द्र है। यह मंदिर भगवान राम और सीता के साथ कृष्ण की प्रतिमाओं के लिए ही नहीं, राम मंदिर में हर साल होने वाली कृष्ण लीला और भगवान श्री राम की जन्म कुंडली के वाचन के लिए भी प्रसिद्ध है। रघुनाथ मंदिर में स्थापित भगवान श्रीराम की प्रतिमा मनमोहक और श्रद्धालुओं के लिए वर देने वाली है। प्रभु राम के एक हाथ में धनुष और दूसरे हाथ में तीर है। श्री रघुनाथ महोत्सव कमेटी के अध्यक्ष विष्णु दत व्यास बताते है कि मंदिर में होने वाले उत्सव के दिन भगवान राम के हाथ में स्वर्ण धनुष व तीर श्रृंगारित किए जाते हैं। पूरे साल रजत से बने धुनष और तीर भगवान राम के हाथ में रहते हैं।

जन्म कुंडली का होता है वाचन

तेलीवाड़ा रघुनाथ मंदिर में रामनवमी के दिन हर साल भगवान श्री राम की जन्म कुंडली का वाचन होता है। व्यास के अनुसार मंदिर में स्थापित हनुमान प्रतिमा के समक्ष दशकों से जन्म कुंडली का वाचन हो रहा है। रामनवमी के दिन मध्याह्न 12 बजे जन्म कुंडली का वाचन होता है।

राम मंदिर में शरद पूर्णिमा की रात होतीहै कृष्ण लीला

शरद पूर्णिमा की रात्रि को रघुनाथ मंदिर में कृष्ण लीला का मंचन होता है। यह परम्परा शताब्दियों से चल रही है। शरद पूर्णिमा के दिन पहले मंदिर प्रांगण में कृष्ण लीला होती है। फिर मंदिर परिसर से बाहर पूरी रात कृष्ण लीला का मंचन होता है। कृष्ण लीला में राजा बलि, महादेवी लीला और कृष्ण लीला का मंचन मोहल्ले के स्थानीय कलाकार पूरी रात करते हैं। गीत, नृत्य, संवाद और दोहों के माध्यम से कृष्ण लीला का मंचन होता है। यहां भगवान कृष्ण प्राण प्रतिष्ठित मुकुट धारण करते हैं।