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पंछी को तो छाया मिले, फल भी लागे नजदीक

बीकानेर. रेगिस्तानी में काश्तारों के लिए वरदान बन रहा खजूर, अनुसंधान केन्द्र में तैयार हुए फल

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पंछी को तो छाया मिले, फल भी लागे नजदीक

पंछी को तो छाया मिले, फल भी लागे नजदीक

बीकानेर. बड़ा भया तो क्या भया जैसे पेड़ खजूर, पंछी को छाया नहीं फल लागे अति दूर। भले ही खजूर के बारे में यह मुहावरा प्रचलित होगा, लेकिन बीकानेर में स्थिति इसके विपरित है। यहां पर जो खजूर के पेड़ लगे हैं, वो छाया भी दे रहे हैं, और उन पर लगे फलों को आसानी से तोड़ा जा सकता है। यह पेड़ झुरमुट की तरह है। खजूर की यह विशेष किस्म स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के खजूर अनुसंधान फार्म में इन दिनों तैयार है। यहां पर 34 किस्मों पर अनुसंधान चल रहा है। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो रेगिस्तानी क्षेत्रों में खजूर की यह खेती किसी वरदान से कम नहीं है। इसकी बिक्री से किसान अपनी आय का स्रोत बढ़ा सकता है। वर्तमान में खजूर के फल को पेड़ से निकाला जा रहा है। फिलहाल यह फल कच्चे है। मुख्य तौर पर बरही, हलावी, खूनिजी, मेदजूल, खदरावी मुख्य किस्में है। इसके अलावा मेडजुल किस्म का उपयोग छुहारे बनाने में किया जाता है। बाकी की किस्मों का डोका अवस्था में सेवन किया जा सकता है।
300 क्विंटल पैदावार
बीकानेर स्थित खजूर अनुसंधान केन्द्र में करीब 450 पेड़ों में इन दिनों फल है। इनमें से लगभग 300 क्विंटल खजूर की पैदावार इस बार हुई है। खजूर के फलों की चार अवस्थाएं होती है जिन्हे गंडोरा अवस्था, डोका, डेंग व पिंड अवस्था कहते है। बीकानेर में सामान्यत डोका अवस्था में खजूरो की तुड़ाई की जाती है। जंगली खजूर का वैज्ञानिक नाम फिनिकस सिलवेस्ट्रिस है, जो गुजरात के कच्छ क्षेत्र में भी पाया जाता है। जबकि बगीचे के रूप में फिनिकस डेक्टाईलीफेरा लगाया जाता है। इसमें चार से पांच साल में कम ऊंचाई पर फल लग जाता है। खजूर की फसल तैयार होने में तीन साल का समय लगता है।

भरपूर मात्रा में केलोरी
अनुसंधान निदेशक डॉ. एस एल गोदारा, क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ प्रकाश सिंह शेखावत ने बताया कि खजूर के फलों में 3000 केलोरी ऊर्जा प्रति किलोग्राम फल में होती है। इसमें आयरन, पोटेसियम, कैल्सियम व फास्फोरस की प्रचूर मात्रा होती है और विटामिन ए, बी 1ए बी 2 व बी 6 भी पाया जाता है। खजूर में पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज, फ्रक्टोज और सुक्रोज पाया जाता है जो शीघ्र विकास और ताकत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह बीकानेर के अलावा जैसलमेर, बाड़मेर सहित कई जिलों में इसकी पैदावार होती है।

लगातार बारिश नुकसानदायक
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार डेंग अवस्था में लगातार कुछ दिनों तक यदि बरसात होती रहे, वातावरण में नमी की मात्रा अधिक हो जाए तो फल खऱाब हो जाते है। इसलिए फलो को डोका अवस्था में तोड़कर बरसात आने से पहले बेचा जाता है। इन फलों को डीफ्रिज या रेफ्रीजरेटर में संग्रहित कर सकते है। उनका मूल्य सवर्धन करके खजूर के उत्पाद बना लेते है।