
अनूठे कृष्ण मंदिर- यहां सुदामा-गरुड व सीताराम के साथ है कृष्ण
बीकानेर नगर की स्थापना के बाद से शहर में मंदिरों के स्थापित होने के प्रमाण है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में देवी-देवताओं के शताब्दियों पुराने प्राचीन श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा केन्द्र है। ये प्राचीन मंदिर अपनी कलात्मकता, विशिष्ट बनावट, स्थापित प्रतिमाओं की भव्यता और पर्व-उत्सवों के आयोजन को लेकर प्रसिद्ध है। शहर में कई ऐसे प्राचीन कृष्ण मंदिर है जो तीन से चार शताब्दी प्राचीन है। मंदिरों में विशिष्टता लिए स्थापित प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के मन मस्तिष्क पर अमिट छाप बनाए हुए है। सामान्यत: श्री कृष्ण मंदिरों में स्थापित प्रतिमाएं राधा के साथ अथवा कृष्ण की अकेली प्रतिमाएं होती है, लेकिन शहर के कई श्रीकृष्ण मंदिरों में स्थापित कृष्ण की प्रतिमाओं के विभिन्न स्वरुप, अन्य देवी देवताओं के साथ प्रतिमाएं, न केवल अनूठी है बल्कि प्रसिद्ध भी है।
यहां मूंछो वाले कृष्ण
देवी कुण्ड सागर में िस्थत छह मंदिर में िस्थत कृष्ण मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा मूंछों वाले कृष्ण की है। कृष्ण प्रतिमा के पास दो सखिया भी है। मूंछों वाले कृष्ण की यह प्रतिमा अनूठी है। बताया जा रहा है कि इस मंदिर का निर्माण 140 वर्ष पहले हुआ था। इस मंदिर में कृष्ण राजस्थानी साफा व मूंछों के साथ राठौड़ी स्वरुप में नजर आते है।
कृष्ण के साथ है सुदामा की मूर्ति
भगवान श्रीकृष्ण की अपने बालसखा सुदामा से गहरी मित्रता थी। सुदामा से श्रीकृष्ण अथाह प्रेम भी करते थे। देवी कुण्ड सागर में िस्थत दस मंदिर में िस्थत श्री राज गोपाल मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा के पास ही बालसखा सुदामा की प्रतिमा भी स्थापित है। बीकानेर का यह एकमात्र मंदिर है, जिसमें कृष्ण के साथ बालसखा सुदामा भी है।
नगर स्थापना के समय आई यह प्रतिमा
मरुनायक चौक में िस्थत मूलनायक अथवा मरुनायक मंदिर शहर के प्राचीन मंदिरों में एक है। यहां भगवान श्री कृष्ण की भूरे पत्थर से निर्मित नृसिंह स्वरुप में मूर्ति है। यहां सालभर पर्व, उत्सव और दर्शन-पूजन का क्रम चलता रहता है। बताया जा रहा है कि राव बीका के साथ आए सालोजी राठी इस प्रतिमा को अपने साथ लेकर आए व यहां स्थापित की।
यहां राम-सीता के साथ है श्रीकृष्ण
तेलीवाड़ा चौक िस्थत रघुनाथ मंदिर करीब चार शताब्दी प्राचीन है। इस मंदिर में रामनवमी और जन्माष्टमी दोनों पर्व मनाए जाते है। इसका कारण है यहां भगवान राम और सीता के साथ श्रीकृष्ण की प्रतिमा भी स्थापित है। यहां शरद पूर्णिमा के दिन हर साल रासलीला का मंचन होता है। इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था व श्रद्धा है।
इस मंदिर में कृष्ण के साथ है गरुड प्रतिमा
देवी कुण्ड सागर िस्थत दस मंदिर में िस्थत श्री सुरत गोपाल मंदिर प्राचीन है। यहां मंदिर में भगवान श्री कृष्ण व सुदामा की प्रतिमा के साथ भगवान गरुड की भी प्रतिमा है। संभवत यह एकमात्र मंदिर होगा, जिसमें निज मंदिर में कृष्ण की मूर्ति के साथ गरुड की भी मूर्ति हो। कृष्ण की मूर्ति ऊपर व गरुड की मूर्ति नीचे स्थापित है।
यहां शेषनाथ को हाथ में लिए है श्रीकृष्ण
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में कालिया नाग के मर्दन की विशेष लीला है। देवीकुण्ड सागर िस्थत दस मंदिर में िस्थत श्री हलदेव बलदेव जी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण व राधा की प्रतिमाएं स्थापित है। यहां भगवान श्री कृष्ण अपने एक हाथ में शेषनाथ को पकड़े हुए है। नाग का फन राधा व कृष्ण के सिर के ऊपर है। यह प्रतिमा विशिष्ट है।
भगवान कृष्ण प्रतिमा के साथ है गिरिराज पर्वत
रघुनाथसर कुआ के पास िस्थत गिरिराज मंदिर दशकों पुराना है। इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की विशेष आस्था व श्रद्धा है। यहां भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के साथ गिरिराज पर्वत भी है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण व गिरिराज पर्वत का पूजन-अर्चन करते है। जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन के लिए आते है।
पीतल से बनी प्रतिमाएं, पीढ़ी दर पीढ़ी पुजारी
दम्माणी चौक क्षेत्र िस्थत छोटा गोपालजी मंदिर दशकों से श्रद्धालुओं की आस्था व श्रद्धा का केन्द्र है। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण व राधा की पीतल धातु से निर्मित मनमोहक प्रतिमाएं स्थापित है। यहां सालभर दर्शन-पूजन का क्रम चलता रहता है। पुजारी श्रीगोपाल स्वामी के अनुसार वे परिवार के छठी पीढ़ी के पुजारी है, जो मंदिर में सेवा दे रहे है।
172 साल प्राचीन है श्री राज रत्नबिहारी मंदिर
रतन बिहारी पार्क परिसर में िस्थत श्री राज रत्नबिहारी मंदिर 172 साल पुराना है। बीकानेर महाराजा रत्नसिंह व उनकी राणी राजकुंवर ने कृष्ण भक्ति से प्रेरित होकर श्री राज रत्नबिहारी की मूर्ति एवं मंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर में सालभर पुष्टिमार्गीय परम्परा अनुसार पूजन, दर्शन, अर्चन के कार्यक्रमों के आयोजन होते रहते है।
मुरली मनोहर मंदिर है प्राचीन
साले की होली क्षेत्र में पूर्व विधायक गोपाल जोशी के निवास के पास बना श्री मुरली मनोहर मंदिर प्राचीन है। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की काले पत्थर से निर्मित भव्य प्रतिमा स्थापित है। राधा की प्रतिमा पीतल से बनी बताई जा रही है। कहा जाता है कि परकोटा क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों में यह मंदिर एक है, जिसमें रोज श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते है।
बड़ा गोपालजी मंदिर में सालभर होते है पर्व-उत्सव
दम्माणी चौक िस्थत श्री बड़ा गोपालजी मंदिर रियासतकाल से श्रद्धालुओं की आस्था व श्रद्धा का केन्द्र है। निज मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण व राधा की प्रतिमाओं के साथ सालगराम स्वरुप भी है। साल में होने वाले विभिन्न पर्व-त्यौहारों के अवसर पर मंदिर में उत्सव आयोजनों का क्रम चलता रहता है। मंदिर पर में लक्ष्मीनाथ, गणेश, रामदरबार की प्रतिमाएं भी स्थापित है।
ये है शहर में पुष्टिमार्गीय मंदिर
रियासतकाल से शहर में िस्थत पुष्टिमार्गीय मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था व श्रद्धा का केन्द्र बने हुए है। सालभर इन मंदिरों में पुष्टिमार्गीय परम्परा के अनुसार पूजन, अर्चन, आरती और पर्व-त्योहारों को मनाया जाता है। शहर में रतन बिहारी पार्क परिसर िस्थत श्री राज रत्नबिहारी मंदिर, श्री रसिक शिरोमणी मंदिर, तेलीवाड़ चौक में विट्ठलनाथ मंदिर, दाऊजी रोड िस्थत श्री दाऊजी मंदिर, मूंधड़ा बगीची िस्थत श्री मदन मोहन मंदिर, पुष्करणा स्कूल के पास श्री गिरिराज मंदिर, जस्सोलाई व्यास पार्क के पास श्याम सुंदर मंदिर, बिस्सा चौक में श्री द्वारिकाधीश मंदिर, आसानिया चौक में गोवर्धन नाथ मंदिर व दम्माणी चौक में मदन मोहन मंदिर पुष्टिमार्गीय मंदिर है। इन मंदिरों में शुक्रवार को जन्माष्टमी पर्व मनाया जाएगा।
सूंठ और गोंद के लड्डुओं की महक
श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर घर-घर में पारम्परिक पकवान तैयार किए गए है। इन पकवानों का भोग शुक्रवार को भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय पूजन-अर्चन के बाद अर्पित किए जाएंगे। जन्माष्टमी को लेकर घर-घर में सूंठ के लड्डू, गोंद के लड्डू, पंजेरी, हलुआ, धनियां, तालमखाणा, मूंगफली, मावा व मैदा से तैयार होने वाले टिकला, खाजा, कजली, नमकीन, कलाकंद, पेठा, चीनी चासनी पेठा, गुलाब जामुन, पेड़ा सहित विभिन्न तरह की सामग्री रात तक तैयार होती रही। इन सामग्री का भोग भगवान कृष्ण के लगाया जाएगा।
गली-मौहल्लों से मंदिरों तक होगा कंस वध
जन्माष्टमी के दिन शहर में कंस के प्रतीकात्मक वध की परम्परा है। बच्चों से बुजुर्ग तक तालाब की मिट्टी से मटकी परप कंस की अनुकृति बनाएंगे। काले व लाल रंग से कंस को कलात्मक रुप दिया जाएगा। जाल की पत्तियों के नीचे कंस को रखा जाएगा। भगवान कृष्ण के जन्म के समय कंस का वध लाठियों से पीट पीट कर किया जाएगा।
मंदिर सजे, रोशनी व पुष्पों से सजावट
जन्माष्टमी को लेकर शहर के कृष्ण मंदिर सज गए है। मंदिरों को रंगीन रोशनी और विभिन्न प्रकार के पुष्पों से सजाया जा रहा है। बड़ी संख्या में दर्शन-पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के मद्देनजर मंदिरों में व्यापक व्यवस्थाएं की गई है। मंदिरों में गुरुवार देर रात तक तैयारियां चलती रही। मंदिर ट्रस्ट, समितियां और श्रद्धालु जन्माष्टमी पर्व की तैयारियों में जुटे हुए है।
पंचामृत से होगा अभिषेक
जन्माष्टमी पर मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमाओं व बाल स्वरुप लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक, पूजन कर श्रृंगार किया जाएगा। कई मंदिरों में सुबह व कई मंदिरों में मध्याह्न के समय अभिषेक के आयोजन होंगे। श्रद्धालुओं में पंचामृत प्रसाद का वितरण किया जाएगा। घर-घर में कान्हा के जन्म के समय लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा।
कृष्ण जन्मोत्सव के होंगे आयोजन
श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार को शहर में जगह-जगह श्री कृष्ण जन्मोत्सव के आयोजन होंगे। बच्चे भगवान कृष्ण व राधा का स्वरुप धारण करेंगे। भक्ति संगीत व नृत्य के आयोजन होगे। मंदिरों में कृष्ण भजनों की प्रस्तुतियां होंगी।
Published on:
19 Aug 2022 11:22 am
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