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अब कोटेशन पर किच-किच, 5 लाख का नियम, खर्च किए 50 लाख

नगर निगम - वित्त विभाग के नियम दरकिनार, विभिन्न अनुभाग धड़ल्ले से कर रहे कोटेशनमहापौर ने अधिक राशि के कोटेशन पर जताई आपत्ति, डीएलबी निदेशक को भेजा पत्र

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अब कोटेशन पर किच-किच, 5 लाख का नियम, खर्च किए 50 लाख

अब कोटेशन पर किच-किच, 5 लाख का नियम, खर्च किए 50 लाख

नगर निगम में कोटेशन-कोटेशन का खेल चल रहा है। निगम के विभिन्न अनुभाग वित्त विभाग की ओर से जारी नियमों को दरकिनार कर धड़ल्ले से कोटेशन जारी कर रहे है। बताया जा रहा है कि वित्त विभाग के नियमों के अनुसार एक साल में अधिकतम पांच लाख रुपए तक की राशि के ही कोटेशन जारी किए जा सकते है, लेकिन निगम की केवल निर्माण शाखा ने ही करीब 50 लाख रुपए की राशि के निर्माण कार्य कोटेशन के माध्यम से करवाए है। निगम की विद्युत शाखा, स्टोर, गैरेज, स्वास्थ्य शाखा, लेखा शाखा, स्टेशनरी शाखा सहित अन्य शाखाओं की ओर से कोटेशन के माध्यम से करवाए गए कार्यों की संख्या और राशि और जोड़े तो वित्त विभाग के नियमों की पालना कही होती नजर नहीं आ रही है।

पूर्व में 23 व पश्चिम में 29 कोटेशन

निगम में वित्त विभाग के नियमों के दरकिनार होने व कोटेशन के माध्यम से निर्माण शाखा में कार्य होने पर निगम महापौर सुशीला कंवर ने भी आपत्ति जताई है। बुधवार को स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक एवं विशिष्ठ सचिव को लिखे पत्र में निगम आयुक्त पर राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के उल्लंघन का आरोप लगाया है। पत्र में बताया है कि आयुक्त ने महज सात महीनों में ही नियमों को दरकिनार एक वर्ष में अधिकतम कोटेशन की वित्तीय सीमा से अधिक कोटेशन जारी किए है। केवल निर्माण शाखा में ही इस वित्तीय वर्ष में अब तक 52 कोटेशन लगभग 50 लाख रुपए लागत के कोटेशन जारी किए जा चुके है। इनमें अधिकतर कोटेशन नाली, नाली क्रॉस,सड़क निर्माण आदि से संबंधित है। महापौर ने भ्रष्टाचार और कुछ ठेकेदारो से सांठ-गांठ का अंदेशा भी व्यक्त किया है।

यह है नियम

लेखा नियमों के जानकारों का कहना है कि वित्त विभाग के नियमों में कोटेशन को लेकर स्पष्ट निर्देश है कि एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम पांच लाख रुपए तक की लागत के कार्य या खरीद के लिए ही कोटेशन किए जा सकते है। कोटेशन के लिए 10 हजार रुपए से अधिक व एक लाख रुपए की राशि से कम राशि के ही कोटेशन जारी किए जा सकते है। एक वित्तीय वर्ष में कोटेशन की राशि पांच लाख रुपए से अधिक नहीं हो सकते है।

कोटेशन जरुरी या चहेतों को लाभ

निगम की ओर से निर्धारित राशि से अधिक कोटेशन जारी करने का मामला निगम के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। निगम अधिकारी, कर्मचारी और पार्षद अपने-अपने हिसाब से इस पर राय भी रख रहे है। कुछ लोगों का मानना है कि जरुरी कार्य अगर कोटेशन के माध्यम से होते है तो गलत नहीं है। वहीं कुछ लोगों का सीधा आरोप है कि कोटेशन के माध्यम से चहेतों को लाभ दिलवाने की सोच होती है। इनका कहना है कि जिन फर्मों को बार-बार कोटेशन दिए गए, इसका प्रमाण है।

आवश्यक प्रकृति के कार्य जरुरी

वित्त विभाग के नियमों की पालना आवश्यक रुप से की जाती है। निगम क्षेत्र काफी बड़ा है। आमजन से जुड़े वे कार्य जो आवश्यक प्रकृति के है व करवाने जरुरी होते है। वहीं वित्त विभाग के नियम के अनुसार निगम निर्माण कार्य बिना निविदा के बीएसआर दर के अनुसार भी करवा सकता है।
गोपालराम बिरदा, आयुक्त, नगर निगम, बीकानेर।