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मंडी में खरीदारों ने खींचे हाथ, कारोबार पर असर

bikaner news - Buyers pull hands in market, impact on business

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मंडी में खरीदारों ने खींचे हाथ, कारोबार पर असर

मंडी में खरीदारों ने खींचे हाथ, कारोबार पर असर

आढ़त घटने के बाद खरीदारों को रास नहीं आए नए नियम
बीकानेर.
कच्ची आढ़त व्यापार संघ के खरीद-फरोख्त को लेकर बनाए गए नए नियम खरीदारों को रास नहीं आ रहे हैं। नतीजन उन्होंने जिंसों की खरीद से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसका असर अब कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। हालांकि वर्तमान में अनाज मंडी में जिंसों की आवक शुरू नहीं हुई है, लेकिन पिछले चार-पांच दिन से खरीदार और बिकवाल के बीच नई शर्तों को लेकर आपसी सामंजस्य नहीं बैठ पा रहा है।

राज्य सरकार की ओर से आढ़त को ढ़ाई फीसदी से पौने दो फीसदी करने के बाद कच्ची आढ़त व्यापार संघ ने मुद्द और भुगतान नियमों में बदलाव करने का निर्णय लिया था। कच्ची आढ़त व्यापार संघ के उपमंत्री बाबूलाल रिंटोड़, उपाध्यक्ष जयदयाल डूडी एवं महामंत्री नंद किशोर राठी ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से आढ़त घटाने के बाद संघ के पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि मुद्दत 25 पैसा व भुगतान अवधि 4 दिन छूट के बाद पांचवें दिन अवश्य रूप से करने का प्रस्ताव किया गया।

उन्होंने बताया कि अपवाद स्वरूप विशेष परिस्थितियों में तय समय सीमा में भुगतान नहीं होने की स्थिति में छूट के बाद एक रुपया पचास पैसा प्रति माह प्रति सैंकड़ा की दर से ब्याज चेक के साथ देने का भी निर्णय लिया गया। इसी प्रकार इसबगोल, जीरा सहित अन्य वस्तुओं में आढ़त मात्र एक प्रतिशत की छूट के बाद तीसरे दिन भुगतान करने पर मुद्दत 0.25 पैसा व दो दिन की छूट के बाद तीसरे दिन भुगतान अवश्य करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

उधर कच्ची आढ़त व्यापार संघ के फैसले पर बीकानेर अनाज कमेटी, मूंगफली दाना मिल एसोसिएशन, श्रीबीकानेर ऑयल मिल एसोसिएशन, बीकानेर दाल मिल एसोसिएशन तथा बीकानेर ग्वार-गम मिल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुहर नहीं लगाई है। ऐसे में जिंसों की खरीद का मामला अभी भी अधर में छूल रहा है। पक्की आढ़त व्यापार संघ के अध्यक्ष जयकिशन अग्रवाल ने बताया कि कच्ची और पक्की आढ़त व्यापार संघ के बीच हमेशा से ही सामंजस्य के भाव रहे हैं।

आढ़त कम करने का फैसला चूंकि राज्य सरकार का है। इसके बावजूद खरीदार सहयोग करने के लिए तैयार है। लेकिन कच्ची आढ़त व्यापार संघ को खरीदारों का भी ध्यान रखना होगा। बाजार में खरीदारों के लिए अब काफी विकल्प हो गए हैं। बाजार प्रतिस्पद्र्धा के चलते आपस में बैठकर इस मामले को जल्द सुलझाने में ही फायदा होगा। शुक्रवार रात तक मुद्दत और भुगतान अवधि के फैसले को लेकर कोई सर्वसम्मति नहीं बन पाई। हालांकि कच्ची आढ़त व्यापार संघ ने बोली व्यवस्था शुरू कर दी है।