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धोरों में कैमल सफारी, देशी-विदेशी कलाकारों ने किया बीकानेर भ्रमण

फ्री इंटरनेशनल आर्टिस्ट ग्रुप की ओर से आयोजित अन्तरराष्ट्रीय बीकानेर कला महोत्सव के चौथे दिन देशी-विदेशी कलाकारों ने रेतीले धोरों में कैमल सफारी का आनन्द लिया।

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Camel safari

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बीकानेर. फ्री इंटरनेशनल आर्टिस्ट ग्रुप की ओर से आयोजित अन्तरराष्ट्रीय बीकानेर कला महोत्सव के चौथे दिन सोमवार को देशी-विदेशी कलाकारों ने रेतीले धोरों में कैमल सफारी का आनन्द लिया। देशनोक स्थित करणी माता मंदिर में बड़ी संख्या में चूहों को देख अचंभित भी हुए। बीकानेर भ्रमण पर निकले कलाकार पहले करणी माता मंदिर पहुंचे। उन्होंने आरती में भाग लिया और भजन-संगीत का
आनन्द लिया।

कार्यक्रम संयोजक श्रीगोपाल व्यास के अनुसार इसके बाद कलाकार उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र पहुंचे और ऊंटों पर अनुसंधान की जानकारी ली। उन्होंने ऊंटनी के दूध का स्वाद चखा और चमड़े से बने उत्पादों में दिलचस्पी दिखाई। ट्यूनीशिया से आई आलिया को ऊंट के चमड़े से बने बैग अधिक पसंद आए। भ्रमण कार्यक्रम के तहत कलाकार रायसर गांव भी गए। उन्होंने रेतीले धोरों पर कैमल सफारी, जीप सवारी का आनन्द लिया। ऊंट गाड़े पर बैठकर धोरों के बीच बनी ढाणियां देखी। कलाकारों ने धोरों की सुंदरता को कैमरों में
कैद किया।

कुलरिया को श्रद्धांजलि
कलाकारों के दल ने गांव में सैंड आर्ट से बनाई गई तीस फीट लम्बी दुलाराम कुलरिया की प्रतिमा को देखा। इस प्रतिमा को महावीर रामावत और उनके साथी कलाकारों ने बनाया। देशी-विदेशी कलाकारों और स्थानीय कलाकारों ने प्रतिमा मंे रंग भरा। शाम को ११०० दीपक रोशन कर कलाकारों ने दुलाराम कुलरिया को श्रद्धांजलि दी।


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