
caste certificate
प्रत्येक छह माह बाद क्या इंसान की जाति बदल जाती है? जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदकों के दिमाग में यह सवाल बार-बार आता है लेकिन इसका जवाब देने वाला कोई नहीं मिलता।
फिलहाल लूणकरनसर उपखण्ड कार्यालय की ओर से जाति प्रमाण बनवाने की प्रक्रिया अधिक जटिल कर देने से आवेदक ई-मित्र केन्द्रों व तहसील व उपखण्ड कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
गौरतलब है कि अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों व अन्य लोगों को हर बार छह माह बाद नया जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
कॉलेज व विद्यालयो में प्रवेश फार्म भरने के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं व छात्रवृति के लिए विद्यार्थियों को जाति प्रमाण पत्र बनवाने पड़ते हैं।
जानकारी के अनुसार जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन केे साथ दस्तावेज बढ़ा देने से लोग परेशानी में है। पूर्व में बने जाति प्रमाण पत्र की प्रति आवेदन के साथ लगाने के बाद भी नया प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है।
साथ ही जमीन की जमाबन्दी, आय प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड आदि कई दस्तावेज संलग्र करने पड़ रहे है।
ई-मित्र केन्द्र संचालकों ने बताया कि क्षेत्र में जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया जटिल कर देने से बार-बार कमियां निकालकर आवेदन वापस आ रहे है।
बन रहे हैं जाति प्रमाण पत्र
उपखण्ड अधिकारी के अनुसार जाति प्रमाण पत्र लगातार बनाए जा रहे है। आवेदन के साथ दस्तावेज सरकार द्वारा निर्धारित किए गए है। विद्यार्थियों के जाति प्रमाण पत्र स्कूल के शाला प्रबन्धन द्वारा एक साथ बनवाने चाहिए।
रतनलाल स्वामी, उपखण्ड अधिकारी लूणकरनसर।
Published on:
28 Oct 2016 01:09 pm
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