
अमेरिका से संगीत सीखने आई हैं बीकानेर, रोजाना पांच-छह घंटे करती हैं रियाज
बीकानेर. 'संगीत की कोई सीमा नहीं होती है। भारतीय शास्त्रीय संगीत में जो मिठास है, वो कहीं ओर नहीं।Ó यह कहना है अमेरिका से आई कैथरीन रिचर्ड्स का। उन्होंने कहा कि वे भारतीय शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीखने के लिए सात समंदर पार से बीकानेर आई हैं। उनके साथ पिता मिकेल ली रिचर्ड्स भी आए हैं।
दोनों पिता-पुत्री बीकानेर के तबलावादक गुलाम हुसैन व पुखराज शर्मा से सितार और तबला की तालीम ले रहे हैं। कैथरीन ने बताया कि वे पांच दिन पहले यहां आए थे और रोजाना ५-६ घंटे संगीत का रियाज कर रहे हैं। वे चार दिन और संगीत सीखेंगी। इसके बाद अमेरिका अपने घर चली जाएंगी। करीब तीन माह बाद कैथरीन व उनके पिता दोबारा बीकानेर आएंगे और संगीत की तालीम हासिल करेंगे।
दिमाग को देता है शांति
कैथरीन ने बताया कि म्यूजिक का बचपन से शौक है। वे सितंबर में भारत घूमने आई थी। इससे पहले ऋषिकेश में संगीत सीखा था। कैथरीन ने कलर्स ऑफ राजस्थान टूर्स के संचालक अतिक अहमद से बीकानेर व संगीत के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि भारतीय संगीत में मधुरता बहुत ज्यादा है।
उनका मंगेतर भी संगीतकार है और उनका बैंड है, लेकिन उस बैंड में भारतीय संगीत कोई नहीं बजाता है। इसी के लिए वे भारतीय संगीत सीखने बीकानेर आई हैं। भारतीय संगीत में अद्भुत शक्ति है और दिमाग को शांति देता है। सितार व तबला बजने से दिमाग को सुकून मिलता है।
डिजाइनर हैं कैथरीन
कैथरीन ग्राफिक डिजाइनर हैं और उनके पिता मैकेनिक हैं। दोनों को म्यूजिक से बहुत लगाव है। उन्होंने बताया कि वे भारतीय संगीत को अमेरिका ले जाना चाहती हैं, ताकि वहां के लोगों को भी भारतीय संगीत की अहमियत पता चले।
Published on:
08 Nov 2018 10:25 am
