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बीकानेर सेंट्रल जेल सुरक्षा मानकों में फेल

गैंगवार के लिए चर्चा में रही बीकानेर की सेंट्रल जेल के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से नामित समिति ने जेल के सुरक्षा मानकों सहित अन्य व्यवस्था में सुधार का सुझाव दिया है।

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जयप्रकाश गहलोत/बीकानेर. गैंगवार के लिए चर्चा में रही बीकानेर की सेंट्रल जेल के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से नामित समिति ने जेल के सुरक्षा मानकों सहित अन्य व्यवस्था में सुधार का सुझाव दिया है। समिति ने यह रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी थी। अब गृह विभाग ने यह रिपोर्ट जेल डीजी को सौंप दी है।

रिपोर्ट में प्रशासनिक स्तर पर लेक ऑफ मॉनिटरिंग की बात भी कही गई है। सेंट्रल जेल की सुरक्षा सहित मानव अधिकारों की स्थिति को लेकर अध्ययन के लिए 26 अप्रेल को रिटायर्ड आइएएस अधिकार विनोद अग्रवाल की अध्यक्षता में एक कमेटी ने बीकानेर जेल का निरीक्षण किया था। कमेटी ने रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी थी।

जेल में अनदेखी गंभीर विषय

सेंट्रल जेल में प्रशासनिक अनदेखी गंभीर विषय है। यहां पहले भी गैंगवार की कई घटनाएं हो चुकी हैं। वारदातों के समय भी जेल की सुरक्षा और संसाधनों पर सवाल उठे थे। जेल प्रशासन को समय रहते सतर्क हो जाना चाहिए। हालांकि इस संबंध में मेरी ओर से की गई जांच रिपोर्ट गृह विभाग को भेज चुका हूं।
विनोद अग्रवाल, समिति अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी

यह बताया रिपोर्ट में

- जेल में हॉस्पिटल को लेकर समिति ने नाराजगी जताई है। कागजों में हॉस्पिटल 80 बेड का बताया गया है, जबकि अस्पताल में 24 बेड ही हैं।
- तीन साल में जेल में 12 मौत व 3 आत्महत्या की घटनाए हुई।
- जेल का 1600 बीघा का कैम्पस है, लेकिन स्टाफ की कमी से सुरक्षा मानकों पर भी जेल खरी नहीं उतर रही है।
- समिति ने जेल की रसोई को तुरन्त अत्याधुनिक बनाए जाने जरूरत बताई।
- अंडर ट्रायल कैदियों की व्यवस्था को लेकर भी समिति ने सवाल उठाते हुए दुरुस्त करने की सिफारिश की है।
- समिति ने जेल को जोडऩे वाली सड़क सहित जेल के भीतर भी सड़कों की खस्ता हालत को सुधारने करने की सिफारिश की।
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिपोर्ट में मॉनिटरिंग स्तर पर कमी बताई गई है।