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ऊंटनी के दूध से बन रही चॉकलेट, डायबिटीज रोगी भी खा सकेंगे

कैमकैट : बीकानेर के राष्ट्रीय ऊष्ट अनुसंधान केंद्र ने लिया चॉकलेट का ट्रेडमार्क  

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ऊंटनी के दूध से बन रही चॉकलेट, डायबिटीज रोगी भी खा सकेंगे

ऊंटनी के दूध से बन रही चॉकलेट, डायबिटीज रोगी भी खा सकेंगे

बृजमोहन आचार्य

आमतौर पर चिकित्सक दांतों और गले का हवाला देकर बच्चों को चॉकलेट से परहेज़ रखने की सलाह देते हैं। लेकिन अब बीकानेर िस्थत राष्ट्रीय ऊष्ट अनुसंधान केंद्र ने ऐसी चॉकलेट इजाद की है जो स्वादिष्ट होने के साथ औषधीय गुणों से भरपूर भी होगी। इसका स्वाद मधुमेह रोगी भी ले सकेंगे। जल्दी ही यह चॉकलेट बाजार में उपलब्ध होगी। केंद्र के वैज्ञानिकों का कहना है कि चॉकलेट निर्माण में कैमल मिल्क के औषधीय गुणों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। चॉकलेट बनाने में कोकोवा पाउडर, कैमल मिल्क तथा ऐसे स्वीटनर का उपयोग किया जा रहा है जिससे इसका लज़ीज़ स्वाद मधुमेह रोगी भी ले सके। कैमल मिल्क मधुमेह रोगियों के लिए रामबाण होने के साथ ही इम्युनिटी बूस्टर भी है। इस चॉकलेट को बनाने में शुगर फ्री कंटेंट का उपयोग किया जा रहा है। अनुसंधान केंद्र में बनने वाली चॉकलेट को टेड मार्क भी जारी हो गया है। केंद्र को कैमकैट मार्क स्वीकृत किया गया है। एक चॉकलेट की कीमत करीब डेढ़ सौ रुपए रखने की योजना है। छह माह में इसे बाजार में उतारने की तैयारी है।

बने रहेंगे दूध के औषधीय गुण

चॉकलेट बनाने में इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि कैमल मिल्क में व्याप्त औषधीय गुण बने रहे। कोकोवा पाउडर को एक निर्धारित तापमान पर गर्म किया जाएगा। फिर इसे ठंडा कर कैमल मिल्क मिलाया जाएगा। इस विधि को अपनाने से कैमल मिल्क की प्रकृति और गुण बरकरार रहेंगे।

छह महीने में बाजार में उतारने की योजना

इस समय बाजार में जो अधिकांश चॉकलेट मिल रही है, उसे शुगर के मरीज नहीं खा सकते। डायबिटीज मरीजों का ध्यान रखते हुए केंद्र में कैमल मिल्क से चॉकलेट तैयार की जा रही है। आगामी छह माह में बाजार में बेचने की योजना है। अभी अनुसंधान को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

डॉ. आर्तबंधु साहू, निदेशक, राष्ट्रीय ऊष्ट अनुसंधान केंद्र बीकानेर।