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करंट लगने से मजदूर की मौत, मुआवजा के लिए परिजनों ने किया हंगामा

जिला अस्पताल में देर शाम तक धरना रहा जारी, देर शाम तक मांगों पर नहीं बनी सहमति

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करंट लगने से मजदूर की मौत, मुआवजा के लिए परिजनों ने किया हंगामा

करंट लगने से मजदूर की मौत, मुआवजा के लिए परिजनों ने किया हंगामा

नोखा. अणखीसर गांव में चल रहे जल जीवन मिशन के तहत पेयजल संबंधी निर्माण कार्य के दौरान करंट की चपेट में आने से गुरुवार को एक मजदूर की मौत हो गई। पुलिस ने मृतक के शव को नोखा जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया। वहां पर मृतक के परिजनों ने पीडि़त परिवार को 50 लाख रुपए का मुआवजा दिलाने सहित पांच सूत्री मांगों को लेकर धरना शुरू कर दिया। दिनभर वार्ता का दौर चलता रहा, लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बनी।

देर शाम को प्रशासन व पुलिस के अधिकारी अस्पताल में पहुंचे और धरनार्थियों से वार्ता की, लेकिन पांच सूत्री मांगों पर देर शाम तक सहमति नहीं बनने से मृतक के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। देर रात तक एसडीएम कल्पित शिवरान, सीओ भवानी सिंह इंदा, सीआई ईश्वर प्रसाद जांगिड़ व कंपनी प्रतिनिधि समझाइश वार्ता करते रहे।

जानकारी के अनुसार संथेरण निवासी शंकरलाल जाट जल जीवन मिशन के तहत मजदूरी का काम करने आया था। अणखीसर में ओम इंफ्रा स्ट्रक्चर कंपनी द्वारा जलहौद निर्माण का कार्य चल रहा था। यहां निर्माण कार्य के दौरान करंट की चपेट में आने से शंकरलाल की मौत हो गई। उसका शव नोखा जिला अस्पताल में लाकर मोर्चरी में रखवाया गया। यहां पर परिजनों सहित ग्रामीणों ने मृतक के परिवार को 50 लाख रुपए का मुआवजा देने सहित पांच सूत्री मांगों को लेकर मोर्चरी के सामने धरने पर बैठ गए। इस दौरान आरएलपी नागौर जिलाध्यक्ष हनुमान भाकर, नोखा तहसील अध्यक्ष तुलसीराम डूडी, युवा नेता मगनाराम केड़ली, श्रवणराम, भंवर सिंह मकोड़ी, रामस्वरुप बिश्नोई, लिछुराम सारण सहित मृतक के परिजन व ग्रामीण मौजूद रहे। इस दौरान अस्पताल में पुलिस जाब्ता भी मौजूद रहा।

पांच सूत्री मांगपत्र
मृतक के पिता द्वारा प्रशासन को दिए मांगपत्र में बताया कि मृतक शंकरलाल गरीब मजदूर वर्ग से था। उसके दो लड़कियां व एक लड़का है। मृतक के वृद्ध माता-पिता है। परिवार में अन्य कोई सदस्य कमाने वाला नहीं है। इसलिए मृतक के परिवार को विशेष आर्थिक मदद की आवश्यकता है। मृतक परिवार को 50 लाख की मुआवजा राशि देने, लापरवाह अधिकारियों व कार्मिकों पर सख्त कानूनी कार्यवाही कर उनको गिरफ्तार करने, मुख्यमंत्री सहायता कोष से अधिकाधिक सहायता राशि दिलाने, लापरवाह कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की गई।


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