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कलयुग केवल नाम आधारा, सुमिर-सुमिर नर उतरहि पारा

शोभायात्रा के साथ भागवत कथा का समापन, गांव का माहौल हुआ धर्ममय

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कलयुग केवल नाम आधारा, सुमिर-सुमिर नर उतरहि पारा

कलयुग केवल नाम आधारा, सुमिर-सुमिर नर उतरहि पारा

सूडसर. समीपस्थ गांव गोपालसर के ठाकुरजी मंदिर में चल रही साप्ताहिक भागवत कथा मंगलवार को शोभायात्रा के साथ सम्पन्न हुई। यहां मंदिर में बुधवार को राधाकृष्ण मूर्ति की स्थापना होगी।कथा के समापन पर कथावाचक श्यामसुंदर पारीक ने कहा कि भक्त की साधना से खुश होकर भगवान रीझ जाते हैं। उन्होने कहा कि कलयुग केवल नाम आधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा। कलियुग में जीवन के सभी पापों से मुक्ति का एक मात्र आधार भगवान की भक्ति ही है। भगवान का नाम स्मरण करने से ही भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। भगवान नाम में भारी शक्ति है।

उन्होंने व्रत उपासना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोई ईश्वर किसी से भूखे पेट रहकर भक्ति करने को नहीं कहते है। मन पर नियंत्रण और नाम जाप ही इस जगत में पार लगाने के लिए काफी है। दुष्ट व्यक्ति दूसरे के दुख से कभी परेशान नहीं होता बल्कि दूसरे के सुख से परेशान होता है। पुरुषार्थ से ही श्रेष्ठ भाग्य का निर्माण होना संभव है लेकिन इसके लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करते रहना चाहिए। वर्तमान में किए जाने वाला पुरुषार्थ ही हमारे अगले जीवन के अच्छे भाग्य का निर्माण करते है।

महाराज ने कहा कि संसार सागर में भक्ति एक नौका की तरह है। नौका के बिना भव सागर से पार नहीं उतरा जा सकता है। उसी तरह भक्ति के बिना मनुष्य जीवन पटरी पर नहीं चल सकता है। ईश्वर भक्ति का मार्ग अपना कर मनुष्य को मोक्ष का मार्ग पर चलना चाहिए। भागवत कथा के समापन पर शोभायात्रा निकाली गई, जो गांव के मुख्य मार्गों से होते हुए बाबा हरीरामजी मंदिर पहुंचकर विसर्जित हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

राधाकृष्ण मूर्ति की स्थापना
गोपालसर के ठाकुरजी मंदिर के पुजारी कालूदास स्वामी ने बताया कि बुधवार सुबह साढ़े सात बजे मंदिर में भगवान राधाकृष्ण मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई। इसके बाद सुबह नौ बजे मंदिर में हवन हुआ।


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