
पेड़ काटकर सहेजेंगे पानी, घेघड़ा झील पर रिजर्वायर से नहरबंदी में नहीं होगी परेशानी
रामेश्वर लाल भादू
छतरगढ़़. तहसील क्षेत्र की घेघड़ा झील रिजर्वायर बनने से अब अपना अस्तित्व खोने जा रही है। कभी दिसम्बर-जनवरी में देश विदेश से बड़ी संख्या में विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की यहां कलरव गूंजती थीं।
अब इस जगह में खड़े लाखों पेड़ों पर आरा मशीन चलाई जा रही है। कुछ दिनों में इस मनमोहक जगह को वीरान भूमि में तब्दील कर दिया जाएगा। इस झील व लाखों पेड़ों को बचाने के लिए विभिन्न समाजसेवी संगठनों के पदाधिकारियों के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन कर इसे बचाने के लिए खूब कोशिश की। जिला प्रशासन से लेकर सरकार तक आवाज बुलंद की लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार पर्यावरण संरक्षण को ताक पर रखते हुए रिजर्वायर का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
507 हैड पर बन रहा है जलाशय
राज्य सरकार की ओर से राज्य में 1274 करोड़ रुपए की लागत से चार जगह बनने वाले चार एस्पेक रिजर्वायर के लिए इस जगह का भी चयन किया गया था। छतरगढ़़ क्षेत्र की इंदिरा गांधी नहर की आरडी 507 हैड की घेघड़ा झील पर रिजर्वायर के लिए संबंधित विभागीय निर्माण एजेंसी ने साजो सामान के साथ कार्य शुरू कर दिया है। इस जगह करीब 700 हेक्टेयर पर बनने वाले इस एस्केप रिजर्वायर्स की लागत लगभग 400 सौ करोड़
रुपए है। इसके निर्माण के लिए राज्य सरकार ने टेंडर प्रक्रिया सहित अन्य निर्माण संबंधी प्रक्रिया पूरी होने बाद निर्माण कार्य के लिए हरी झंडी दे दी है। आरडी 507 हैड के नजदीक एक खेत में इस निर्माण कार्य में काम लेने वाली विभिन्न सामग्री को इक_ा करने व श्रमिकों के रहने के लिए प्लांट का निर्माण कार्य पूरा कर लिया हैं।
यहां पर होगी पेयजल आपूर्ति
इस रिजर्वायर में करीब 25 हजार मिलियन क्यूबिक पानी जमा किया जाएगा। यहां से पानी चूरू व झुंझुनूं के लिए पानी भेजा जाएगा। साहवा लिफ्ट केनाल के मार्फत यह पानी जाएगा। नहर बंदी दौरान इन जिलों में भी किल्लत होती है।
पर्यावरण पर पड़ेगा असर
किसानों व जागरूक नागरिकों के अनुसार करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में फैली घेघड़ा झील में विभिन्न प्रजातियों के करीब पचास हजार पौधे वन विभाग की ओर से लगाए हुए हैं। इस झील में कच्चे होने से जलभराव दौरान बड़ी संख्या में कछुए नेङ्क्षस्टग करते हैं। वहीं इस क्षेत्र आसपास चकों के खेतों में इस झील के कारण जल स्तर भी बढ़ता है। अब बड़ी संख्या में पेड़ कटाने से पर्यावरण पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। समाजसेवी लोगों का मानना है कि हजारों पेड़ों की कटाई की अनुमति सरकार ने दी है। इससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाएगा।
इनका कहना है
&एस्केप रिजर्वायर बनने की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब कोशिश रहेगी कि समयबद्ध तरीके से इसका निर्माण कार्य पूरा हो। पश्चिमी राजस्थान के लिए यह रिजर्वायर आने वाली पीढ़ी के लिए पानी की समस्या को दूर करेगा।
असीम मार्कंडेय, चीफ इंजीनियर, आईजीएनपी
Published on:
03 Feb 2023 01:49 am
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