
कृषि भूमि में लगा लिए प्लांट, विभागीय अधिकारी कर रहे लीपापोती
लूणाराम वर्मा
महाजन. कंवरसेन लिफ्ट नहर की 0 आरडी से 459 आरडी तक करीब 200 करोड़ की लागत से हो रहे नवीनीकरण कार्य में विभागीय अधिकारियों के आंख मूंदने से राजस्व विभाग को ठेकेदारों द्वारा लाखों का चूना लगाया जा रहा है। नहर नवीनीकरण के लिए राजमार्ग व नहर के बीच लगाए गए निर्माण प्लांटों में कृषि भूमि का व्यावसायिक में रूपांतरण नहीं करवाकर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
गौरतलब है कि राजस्थान की मरूगंगा के नाम से प्रसिद्ध इंदिरा गांधी नहर परियोजना की 243 आरडी के बिरधवाल हैड से निकलने वाली कंवरसेन लिफ्ट नहर के नवीनीकरण के लिए दो सौ करोड़ की राशि स्वीकृत है। नहर के जीर्णोद्वार के लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर ठेकेदारों के माध्यम से युद्धस्तर पर कार्य शुरू हो चुका है।निर्माण प्लांट में उड़ी नियमों की धज्जियां-
निर्माण कार्य के लिए ठेकेदारों ने राजमार्ग व नहर के बीच प्रति पांच-सात किमी की दूरी में निर्माण सामग्री के बड़े-बड़े प्लांट स्थापित किए है, लेकिन इन प्लांटों में राजस्व विभाग को लाखों का चूना लगाया गया है। नियमानुसार व्यावसायिक कार्य के लिए कृषि भूमि को उपयोग नहीं लिया जा सकता। इसके लिए कृषि भूमि का पहले व्यावसायिक कार्य के लिए रूपांतरण आवश्यक है, लेकिन ठेकेदारों ने सीधे ही किसानों से स्टांप पर अनुबंध कर बिना रूपांतरण के प्लांट लगा लिए, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचा है। नहर विभाग के अधिकारियों द्वारा भी बिना रूपांतरण लगाए प्लांटों को जायज बताकर ठेकेदारों की तरफदारी की जा रही है। करीब दो माह से अधिक समय तक ये प्लांट लगे रहेंगे। जबकि नियमों के मुताबिक कृषि भूमि का बिना रूपांतरण व्यवसायिक उपयोग एक दिन भी नहीं हो सकता।
एक फीट तक ऊंची उठेगी नहर
नहर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि निर्माण कार्य के तहत नहर एक फीट ऊंची उठेगी। साथ ही मशीनों से पूरी नहर का नवीनीकरण होगा। नहर के पैंदे व साइड में मशीनों से एक समान निर्माण सामग्री लगाकर नया रूप दिया जाएगा। इस कार्य के लिए दो सौ करोड़ का बजट जारी हो रखा है। नहर एक फीट ऊंची करने व निर्माण हो जाने से पानी की क्षमता बढ़ेगी व टेल तक पर्याप्त पानी पहुंच सकेगा।महाजन कार्यालय के अधीन है
नहर का आधा हिस्सा-
महाजन स्थित नहर विभाग के सहायक अभियंता कार्यालय के अंतर्गत इस नहर का आधा हिस्सा आता है। नहर की 0 आरडी से 227 आरडी तक महाजन कार्यालय लगता है। जिससे जाहिर है कि सबसे ज्यादा निर्माण कार्य महाजन सहायक अभियंता कार्यालय के अंतर्गत होगा।
इनका कहना है-
ये प्लांट स्थाई नहीं है। नहर का काम होने के बाद इन्हें उठा लिया जाएगा। अस्थाई प्लांट के लिए कृषि भूमि का व्यवसायिक में रूपांतरण जरूरी नहीं होता है।
संदीप भाटी, अधिशासी अभियंता नहर विभाग लूणकरणसर।
अगर कृषि भूमि में बिना व्यावसायिक रूपांतरण प्लांट लगाए है, तो मामले की जांच करवाई जाएगी।
संजीव कुमार वर्मा, उपखण्ड अधिकारी लूणकरणसर।
कृषि भूमि का व्यावसायिक रूपांतरण करवाए बिना व्यावसायिक उपयोग में लेना गलत है। अगर ऐसा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
मदनसिंह यादव, उपतहसीलदार महाजन।
हमारे दो प्लांट लगे हैं। कृषि भूमि का व्यावसायिक रूपांतरण तो नहीं करवाया गया है। हमें तो बीस-पच्चीस दिन ही प्लांट रखना है।
शैलेंद्र सिंह, ठेकेदार।
किसी भी कृषि भूमि को व्यावसायिक उपयोग में लेने के लिए पहले व्यावसायिक रूपांतरण करवाया जाना जरूरी होता है। प्लांट चाहे स्थाई हो या अस्थाई बिना व्यवसायिक रूपांतरण कानून का उल्लंघन है।
गोपाल सिंह सोलंकी, अधिवक्ता बीकानेर।
Published on:
12 May 2023 01:08 am
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