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मिट्टी की सोंधी खुशबू बनाती है पानी को स्वादिष्ट

गर्मी में मटकों की मांग, दो साल बाद कुंभकारों के चेहरों पर लौटी रौनक

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मिट्टी की सोंधी खुशबू बनाती है पानी को स्वादिष्ट

मिट्टी की सोंधी खुशबू बनाती है पानी को स्वादिष्ट

संजय पारीक
श्रीडूंगरगढ़. चिलचिलाती धूप व गर्मी में सूखे कंठ को तर करने के लिए मटकी का पानी मिल जाए तो क्या कहना। भीषण गर्मी के इस मौसम में एसी, कूलर के साथ शहर और ग्रामीण अंचल में मटकों की मांग भी बढ़ गई है। प्रदेशभर में अब गर्मी परवानपर है और गर्मी के इस मौसम में ठंडे पानी के लिए मटकों से बेहतर कोई उपाय नहीं है। कोरोना काल के दो सालों के बाद मटकों की बढ़ती मांग के चलते कुंभकारों के चेहरों पर रौनक लौट आई है।

गर्मी के साथ बढ़ी मांग
जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे मटकों की मांग भी बढ़ रही है। कस्बे के मोमासर बास निवासी शंकर प्रजापत व उनकी पत्नी झीणकार देवी ने बताया कि गर्मी के मौसम में शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के मटके का पानी पीने के शौकीन लोग बड़ी संख्या में मटके खरीदने पहुंच रहे है। 100 से 200 रुपयों तक की कीमत में मटकियां बेची जा रही है। वहीं कुछ कुंभकारों द्वारा शहर व गांवों की गलियों में घूमकर भी मटकियां बेची जा रही है।

शुभ है मिट्टी का बर्तन
कस्बेवासी तुलसीराम चौरडिय़ा ने बताया कि आजकल घरों में फ्रिज और वाटर कूलर है लेकिन गर्मी में अक्सर बिजली की समस्या रहती है जिससे फ्रिज नहीं चलता, इसलिए भी मटका रखना जरूरी है। साथ ही इससे पारंपरिक वस्तुओं को बढ़ावा भी मिलता है। बर्तन बनाने वाले लोगों को रोजगार मुहैया होता है। मटके के पानी में स्वाद भी अधिक होता है। इसमें मिट्टी की सोंधी खुशबू आती है। मिट्टी के बर्तन घर मे रखना शुभ होता है।


दो साल बाद लौटी रौनक
कुंभकार शंकर प्रजापत ने बताया कि मिट्टी के बर्तन बनाकर बेचना पुश्तैनी काम है। इन मिट्टी के बर्तनों को बेचकर जो पैसा आता है उसी से परिवार का पालन पोषण होता है। लेकिन दो साल से कोरोना के चलते हमारा रोजगार चौपट हो गया था। स्थिति ऐसी हो गई थी जो पूंजी लगाई थी वह भी निकलना मुश्किल हो गई थी, लेकिन अब स्थिति सामान्य होने के बाद अच्छी-खासी बिक्री शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि उनके पास से अब तक करीब 6000 हजार मटकियां बिक चुकी है। अच्छी बिक्री की उम्मीद के चलते बड़ी संख्या में मटकियां तैयार की जा रही है।


इनकी भी मांग
जानकारी के अनुसार गर्मी में टोंटी वाला मटका, सुराही, दही जमाने के लिए कुल्हड़ और मिट्टी के गिलास की सबसे अधिक मांग रहती है। इसके अलावा गमले, गुल्लक, प्याले आदि मिट्टी के बर्तनों की भी मांग रहती है।


मटके का पानी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक
डॉ. एन पी मारू ने बताया कि कुछ भी खाना खाने के बाद फ्रिज का ठंडा पानी पीने से शरीर का तापमान कम हो जाता है। भोजन पचता नहीं। इससे विभिन्न बीमारियां होने लगती हैं। वहीं मटका मिट्टी का बना होता है। मिट्टी में बहुत सारे मिनरल होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। पानी के अंदर मौजूद दूषित तत्वों को मिट्टी का मटका सोख लेता है और पानी को शुद्ध बना देता है। मटके का पानी स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है।