
देशनोक करणी माता मंदिर: जहां चूहों को पिलाते हैं दूध और खिलाते हैं चने का प्रसाद
बीकानेर. बीकानेर से तीस किलोमीटर की दूरी पर देशनोक में िस्थत करणी माता मंदिर अपनी अद्भुत और चमत्कारी शक्ति के लिए विश्वविख्यात है। यह मंदिर चूहों वाली देवी के नाम से भी प्रसिद्ध है। यहां साक्षात चूहों के संसार को देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। मंदिर में हर तरफ उछल-कूद करते और दौड़ते-भागते चूहे दिखाई पड़ते हैं। मंदिर में शारदीय नवरात्र के नौ दिन मेला भरता है। देशी-विदेशी हजारों पर्यटक और श्रद्धालु मां करणी दरबार के दर्शन करने आते हैं। श्रद्धालु माता को मिठाई का प्रसाद चढ़ाते हैं। वहीं चूहों की दूध पिलाकर और भूने हुए चनों को खिलाकर सेवा करते हैं। करणी माता साक्षात मां जगदम्बा का अवतार मानी जाती हैं। करीब साढ़े छह सौ वर्ष पहले इस भव्य मंदिर वाले स्थान पर गुफा में रहकर मां करणी अपने इष्ट देव की पूजा अर्चना करती थीं। यह गुफा आज भी मंदिर परिसर में स्थित है। मां के ज्योर्तिलीन होने पर उनकी मूर्ति की इस गुफा में स्थापना की गई।
सफेद चूहा दिखे, तो माना जाता है शुभ
देशनोक के करणी माता मंदिर के चूहों को स्थानीय श्रद्धालु काबा कहकर पुकारते हैं। मंदिर में चूहों की पूजा होती है। मंदिर का संगमरमर से बना मुख्य द्वार, दीवारों पर उत्कृष्ट कारीगरी, मुख्य द्वार पर लगे चांदी के बड़े किवाड़, माता के सोने के छत्र और चूहों के प्रसाद के लिए रखी चांदी की बड़ी परात मुख्य आकर्षण है। मंदिर में सफेद चूहे का दिखना बहुत शुभ माना जाता है।
कई किलोमीटर लंबी कतारें लगती हैं
करणी माता मंदिर में वैसे तो पूरे साल श्रद्धालुओं का दर्शन पूजन के लिए पहुंचने का क्रम जारी रहता है। परन्तु चैत्र और शारदीय नवरात्र में श्रद्धालुओं की कई किलोमीटर लम्बी कतार लग जाती है। श्रद्धालु पैदल व दंडवत करते हुए भी मां के दरबार में पहुंचते हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही हर जगह चूहे ही चूहे नजर आते हैं। चूहों की अधिकता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर के अंदर मुख्य प्रतिमा तक पहुंचने के लिए पैर घसीटते हुए जाना पड़ता है। डर रहता है कि कोई चूहा पैर की चपेट में आकर घायल नहीं हो जाए।
अनुमान के मुताबिक मंदिर में करीब 25 हजार चूहों के साथ ही सफेद चूहे भी रहते हैं। मंदिर में सुबह और शाम की आरती के दौरान बड़ी संख्या में चूहे निज मंदिर परिसर में दिखाई देते हैं। श्रद्धालु मां करणी के साथ-साथ इन चूहों को भी प्रसाद चढ़ाते हैं। करणी माता बीकानेर राजघराने की कुलदेवी हैं। मंदिर का निर्माण बीकानेर रियासत के महाराजा गंगासिंह ने करवाया था।
सबसे बड़े दीपक में अखण्ड जोत
करीब दो साल पहले एक श्रद्धालु ने मंदिर को चांदी का बड़ा दीपक भेंट किया। इसमें पांच सौ किलो घी डाला जा सकता है। इसके दुनिया का सबसे बड़ा चांदी का दीपक होने का दावा भी किया जाता है। दीपक में अखण्ड ज्योत प्रज्ज्वलित है।
Published on:
26 Sept 2022 02:56 am
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