
आशीष जोशी, बीकानेर। मोटा अनाज राजस्थान की पहचान रही है, लेकिन इसे गुजरात ‘श्रीअन्न’ के रूप में अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिला रहा है। श्रीअन्न के निर्यात में गुजरात सिरमौर बनकर उभरा है। जबकि राजस्थान नौवें पायदान पर खिसक गया है। हैरानी की बात है कि देश में मोटे अनाज के उत्पादन में राजस्थान अव्वल है।
मिलेट्स उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी 28.6 फीसदी है और इसकी खेती के क्षेत्रफल में 36 प्रतिशत भागीदारी है। जबकि इसके निर्यात में हमारी एक फीसदी हिस्सेदारी भी नहीं है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के कृषि एवं प्रसंस्करण खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की हाल में जारी रिपोर्ट के अनुसार गुजरात ने पिछले वित्तीय वर्ष में 283.26 करोड़ रुपए (34.19 मिलियन अमरीकी डाॅलर) का श्रीअन्न विदेशों में निर्यात किया है। देश से मोटे अनाज के कुल निर्यात का 45 फीसदी हिस्सा अकेले गुजरात का है। जबकि राजस्थान से महज 2.15 करोड़ का मोटा अनाज निर्यात हुआ।
दरअसल, वर्ष 2022-23 में गुजरात से 78,106.15 मीट्रिक टन श्रीअन्न विदेशों तक पहुंचा। वहीं राजस्थान से महज 405.71 मीट्रिक टन ही निर्यात किया गया। गुजरात के अलावा महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्य राजस्थान से आगे हैं। गत वर्ष देश से कुल 625.33 करोड़ रुपए (75.48 मिलियन अमरीकी डालर) का श्रीअन्न निर्यात हुआ।
1. अंतरराष्ट्रीय श्रीअन्न वर्ष : वर्ष 2023 को इंटरनेशनल डे ऑफ मिलेट्स के रूप में मनाया गया। विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर श्रीअन्न, इससे बने व्यंजनों, मूल्य वर्धित उत्पादों को विश्व स्तर पर बढ़ावा दिया गया।
2. जी-20 में दिलवाई खास पहचान : जी-20 की अध्यक्षता के दौरान श्रीअन्न पाक कार्निवल, अंतरराष्ट्रीय व्यापार कार्यक्रम, शेफ सम्मेलन, प्रदर्शनी, रोड शो, किसान मेले और दिल्ली में आसियान इंडिया मिलेट फेस्टिवल का आयोजन।
3. वर्चुअल व्यापार मेला : दुनिया भर के निर्यातकों और आयातकों को मंच प्रदान करने के लिए श्रीअन्न वर्चुअल व्यापार मेला विकसित किया गया। यह 24×7, 365 दिन संचालित है।
देश को श्रीअन्न का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च (आईआईएमआर) हैदराबाद को वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र घोषित किया गया है। इंस्टीट्यूट ने श्रीअन्न के रेडी टू ईट और रेडी टू कुक जैसे नवाचार किए हैं। इसके खाद्य पदार्थों की ‘ईट्राइट’ टैग से ब्रांडिंग की जा रही है। नई दिल्ली में श्रीअन्न अनुभव केंद्र (एमईसी) खोला गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में श्रीअन्न को बढ़ावा देने के लिए सर्मपित निर्यात संवद्र्धन मंच (ईपीएफ) की भी स्थापना की गई है। श्रीअन्न विशिष्ट वेबपोर्टल के अलावा आयातकों और उत्पादकों के ई केटलॉग जारी किए गए हैं।
राज्य - मात्रा - कीमत
गुजरात - 78106.15 - 34.19
महाराष्ट्र - 50486.43 - 24.07
बिहार - 19917.76 - 5.53
प. बंगाल - 12587.49 - 3.52
तेलंगाना - 1680.25 - 3.30
तमिलनाडु - 2952.63 - 2.48
आंध्रप्रदेश - 1319.78 - 0.61
कर्नाटक - 429.25 - 0.35
राजस्थान - 405.71 - 0.26
कृषि विवि बीकानेर में मरु शक्ति केंद्र की प्रभारी डॉ. विमला डुकवाल का कहना है कि बाजरे का सर्वाधिक उत्पादन राजस्थान में होता है। मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकारी वितरण में भी इसको जोड़ना चाहिए। मोटा अनाज उत्पादक किसानों को सब्सिडी और अन्य माध्यमों से प्रोत्साहित करना होगा। बीकानेर पिछले लंबे समय से कृषि विश्वविद्यालय के मरु शक्ति केंद्र पर बाजरे से बने प्रोडक्ट तैयार कर रहा है। यहां कई अनुसंधान भी चल रहे हैं। सरकार को इससे जुड़े स्टार्टअप के माध्यम से युवाओं को जोड़ना चाहिए। ताकि मोटे अनाज से नए-नए खाद्य पदार्थ तैयार हो सकें।
Published on:
05 Mar 2024 01:05 pm
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