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गहरी खादानों को पाटकर धरणीधर महादेव मंदिर का किया विस्तार, आज दर्शनीय स्थल के साथ बना सेवा और सरोकार का पर्याय

- 30६ साल पुराना मंदिर: ट्रस्ट की मेहनत और जन सहयोग से आज तालाब और परिसर का सौन्दर्य देखते ही बनता है

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गहरी खादानों को पाटकर धरणीधर महादेव मंदिर का किया विस्तार, आज दर्शनीय स्थल के साथ बना सेवा और सरोकार का पर्याय

गहरी खादानों को पाटकर धरणीधर महादेव मंदिर का किया विस्तार, आज दर्शनीय स्थल के साथ बना सेवा और सरोकार का पर्याय

बीकानेर. पुराने बीकानेर शहर के परकोटे के बाहर ३०६ साल पहले जहां महादेव के आशीवार्द से धरणीधर महादेव मंदिर की स्थापना की गई आज भव्य भवन, मंदिर और तालाब देखते ही बनता है। मंदिर के पास खनन से बनी गहरी खादानों को पाटकर धीरे-धीरे मंदिर का विस्तार होता गया। तालाब के जीर्णोद्धार की निरंतर चली प्रक्रिया के बाद आज शहर के सबसे खूबसूरत और रमणीय स्थानों में से एक धरणीधर मंदिर है। आज के इस स्वरूप तक पहुंचने में सालों की धरणीधर ट्रस्ट की मेहनत, सेवाभावी व भामाशाहों के मदद और कई लोगों का समर्पण छिपा है।

श्रीरामसर रोड पर स्थित धरणीधर महादेव मंदिर की देखरेख और विकास कार्य धरणीधर ट्रस्ट करवा रहा है। शहर के प्राचीन मंदिरों में शामिल यह मंदिर 306 साल पुराना है। यहां साल 1990 से जीर्णोद्धार का काम लगातार जारी है। मंदिर विकास के साथ ट्रस्ट सामाजिक सरोकार के कार्य भी करता है। धरणीधर तालाब, रंगमंच का भी निर्माण करवाया गया है।

पचास करोड़ से अधिक के विकास कार्य हो चुके

ट्रस्ट के सरंक्षक रामकिशन आचार्य ने बताया की यहां पहले केवल मंदिर ही था। सांसद कोटे से एक हॉल का निर्माण कराया गया। शुरू में अकेले ही संघर्ष की शुरुआत की। धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए और काम आगे बढ़ता गया। यहां पर 50 करोड़ से भी अधिक की राशि अब तक खर्च हो चुकी है। अभी भी विकास कार्य जारी है। आगामी दस साल में यहां काम पूरा होगा।

सेवा कार्य में भी आगे

ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने बताया की लॉकडाउन में ट्रस्ट की युवा टीम ने भोजन पैकेट, राशन किट वितरण किए। नहर बंदी के दौरान जरूरतमंद लोगों तक पानी के टैंकरों की निशुल्क सप्लाई भी की। साथ ही केयर सेंटर खोला, जिसमें कोरोना पॉजिटिव मरीज के खाने और रहने की व्यवस्था की गई।

पत्रिका की प्रेरणा से तालाब में कार्य
राजस्थान पत्रिका के अमृतम् जलम अभियान से प्रेरणा लेकर तालाब निर्माण कार्य व विकास कार्य सम्पन हुए। ट्रस्टी बताते है कि तालाब के निर्माण के बाद पहली बारिश में टूट गया। इसके बाद भी हौसला कम नहीं हुआ और तालाब का पुनर्निर्माण करवाया। ताकि पानी वापस आए और पुरानी परम्परा कायम रहे। इस तालाब का नक्शा फ तेहपुर तलाई जैसा बनाया गया है।

खेल मैदान में होते है कई आयोजन

धरणीधर में खेल मैदान का भी निर्माण करवाया गया है। साथ ही मॉर्निंग वॉक करने आने वालों के लिए करीब सवा किलोमीटर का पैदल पथ भी बनाया गया है। मैदान में दशहरे पर रावण दहन, होली पर फ ागणिया फ ुटबॉल का भी आयोजन किया जाता है। साथ ही परिसर का प्रकृति से करीब जुड़ाव के लिए हरियाली पर विशेष जोर दिया गया है। यहां पर एक हजार पौधे लगाए गए है।

इनका रहता है सहयोग

ट्रस्ट के अध्यक्ष दीनदयाल आचार्य, सचिव दुर्गा शंकर आचार्य, पूर्व उपमहापौर अशोक आचार्य, आनंद जोशी, नरेंद्र आचार्य, किशोर पुरोहित, बल्लभ आचार्य, कैलाश आचार्य, सुभाष पुरोहित, कैलाश भार्गव, विशाल सेन, योगेंद्र तिवारी, राजेश दया, सुनील रामावत, अभिषेक आचार्य का निर्माण और विकास में योगदान है।

अब हैरिटेज लुक की ओर बढ़ते कदम

धरणीधर के भव्य भवन में लाल पत्थर का उपयोग किया गया है। अब इस मंदिर, भवन, छतरियों, तालाब और खेल मैदान को हैरिटेज लुक देने की ओर कदम बढ़ाए गए है। ट्रस्ट का मानना है कि अगले दस साल में पूरा स्वरूप बदल जाएगा। यहां बीकानेर आने वाला हर पर्यटक इस स्थल को देखने आए, एेसा बनाने की कोशिश चल रही है।

सेवा में जनता क्लिनिक भी जुड़ेगा

धरणीधर मंदिर परिसर में जनता क्लिनिक स्वीकृत हुआ है। जिसके लिए जमीन दी है और सरकार की ओर से भवन निर्माण कराया जाएगा। पहली किस्त विधायक कोटे १५ लाख जारी हो चुके है। भविष्य में यह धर्म स्थल लोगों को स्वास्थ्य की सुविधा भी देगा। साथ ही ९०० केएल की पानी की टंकी स्वीकृत की गई है। जिसका निर्माण भी शीघ्र होगा।