
चिकित्सकीय पेशे के साथ सेवा कार्य... तो कोई दर्द बांट पेश कर रहे मिसाल
आशीष जोशी
किसी की मुस्कुराहटों पर हो निसार..किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार...फिल्म अनाड़ी के इस गीत की तर्ज पर प्रदेश के कई डॉक्टर अपने चिकित्सकीय पेशे के साथ दूसरों का दर्द भी बांट रहे हैं। यों तो डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है, लेकिन मरीजों का इलाज करने के साथ कुछ चिकित्सक समाज सेवा और मानवता का ऐसा अनुकरणीय कार्य भी कर रहे हैं जो बेमिसाल है। कोई वृद्धाश्रम में जरूरतमंदों के लिए मसीहा बन तो कोई सेनेटरी नैपकिन बांट किशोरियों को संक्रमण से बचाने का काम कर रही हैं। रोगियों का उपचार करने वाले कई डॉक्टर ऐसे भी हैं जो दूषित पर्यावरण का भी इलाज करने में जुटे हैं। पत्रिका ने प्रदेशभर में ऐसे डॉक्टरों को तलाशा जो दूसरों के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं।
जरूरतमंदों और लाचारों के बने मसीहा
कोटा के फिजिशियन डॉ. राजेश सामर वर्ष 2014 से अपनाघर आश्रम में सेवा व उपचार में जुटे हैं। कोरोना संकट के समय जब कोई किसी को छूने से भी डरता था वे फुटपाथ पर नजर आने वाले बीमार, लाचारों के मसीहा बने। संस्था के सदस्यों के साथ रेस्क्यू कर उन्हें अपनाघर पहुंचाया। खुद उन्हें नहलाकर तैयार कर उनका इलाज किया। उनके ऐसे कई उदाहरण हैं। अब वे विवेकानंद नगर सेवा धाम आश्रम व ह्यूमन हेल्प लाइन के वृद्धाश्रम से भी जुड़ गए हैं। वृद्धों की सेवा ही जीवन का ध्येय है।
बांट चुकी 50 हजार सेनेटरी नैपकिन
चौमूं की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. शिखा मील महिला रोगियों को सेवाएं देने के साथ ही महिला स्वास्थ्य के लिए प्रेरणादायी कार्य कर रही है। वे समाज सेवा से जुडक़र किशोरियों और युवतियों को सेनेटरी नैपकिन बांट रही है। डॉक्टरी पेशे के साथ समय निकाल कर क्षेत्र में विशेष अभियान चला रही हैं। डेढ़ साल में स्कूल, कॉलेज और कच्ची बस्तियों में जाकर 50 हजार से अधिक सेनेटरी नैपकिन वितरित कर चुकी हैं। ताकि किशोरियों एवं महिलाओं को गंभीर संक्रमण या बीमारी से नहीं गुजरना पड़े।
पेड़ों वाली डॉक्टर बनी पहचान
चिकित्सकीय दायित्व निर्वहन के साथ डाॅ. रागिनी शाह बांसवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्र में पेड़ों वाली डॉक्टर के नाम से भी पहचानी जाती हैं। वर्ष 2008 में डॉ. शाह ने बदरेल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापन के बाद चिकित्सालय परिसर और मुख्य मार्ग पर पौधरोपण शुरू किया। स्वयं की राशि से सरकारी नर्सरी से पौधे क्रय कर रोपण किया। ट्री गार्ड लगाए, पानी का इंतजाम किया। इसके बाद बड़े स्तर पर अभियानपूर्वक पौधे लगाए। अब तक 50 हजार से अधिक पौधे लगा चुकी हैं। राज्य स्तर पर पर्यावरण क्षेत्र के सर्वोच्च सम्मान अमृता देवी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
दूषित पर्यावरण का कर रहे इलाज
झुंझुनूं जिले के खेतड़ी उपखंड की ग्राम पंचायत सिहोड की ढाणी सागडू निवासी डॉ एसपी यादव चिकित्सा सेवा के साथ गत 15 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण कार्य में भी जुटे हैं। यहां त्रिमूर्ति जोहड़ क्षेत्र में वर्ष 2009 से लगातार राजस्थान पत्रिका के हरयाळो राजस्थान अभियान के तहत पौधरोपण कर रहे हैं। दूषित होते पर्यावरण को सेहतमंद रखना ही उनके जीवन का ध्येय है। पांच हजार से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं। ढाई हजार से ज्यादा पौधे अब बड़े पेड़ बन चुके हैं। यह केवल पौधरोपण ही नहीं करते बल्कि लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए अपने निजी खर्चे से ट्री गार्ड व जाल भी लगाते हैं।
डेढ़ साल में करवाए साठ नेत्रदान
बीकानेर संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के डाॅ जयश्री मुरली मनोहर आउटडोर में आने वाले मरीजों को नेत्र दान के लिए प्रेरित करते हैं। अब तक करीब साठ नेत्रदान करवा चुके हैं। वहीं एक हजार से ज्यादा संकल्प पत्र भरवाए हैं। दृष्टिबाधितों के जीवन में रोशनी भरना जीवन का उद्देश्य बना चुके हैं। इसके लिए आउटडोर में आने वाले नेत्ररोगियों की काउंसलिंग कर उन्हें नेत्रदान का संकल्प पत्र भरने के लिए तैयार करते हैं। कहते हैं, मैंने अंधेरी जिंदगी में रोशनी आते ही उनके चेहरों की चमक देखी है। बस, एक बार महसूस करने की जरूरत है।
Published on:
01 Jul 2023 12:55 pm
बड़ी खबरें
View Allबीकानेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
