
सेवारत चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर सोमवार को सामूहिक अवकाश पर रहे। इससे जिलेभर में चिकित्सा व्यवस्था गड़बड़ा गई। सर्वाधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को हुई। गांवों में चिकित्सक नहीं होने से बुखार-खांसी के मरीज भी बीकानेर पीबीएम व जिला अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराने पहुंचे। जिले में 275 सेवारत चिकित्सक हैं और सभी अवकाश पर रहे।
सेवारत चिकित्सकों के सामूहिक अवकाश के कारण सीएचसी और पीएचसी के अधिकतर चिकित्सक काम पर नहीं आए, जिससे मरीज जिला एवं पीबीएम अस्पताल पहुुंचे। पीबीएम और जिला अस्पताल में मरीजों की आम दिनों से दोगुनी भीड़ रही।
जिला अस्पताल भी मरीजों को खासी परेशानी उठानी पड़ी। जिला अस्पताल अब एसपी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के कारण वहां कॉलेज प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था की थी। ओपीडी में रेजीडेंट चिकित्सकों ने व्यवस्था संभाली। वहीं शहर के राजकीय अणचाबाई अस्पताल में चिकित्सक नहीं पहुंचने से मरीज घंटों तक इंतजार करते रहे।
सरकार की हठधर्मिता का नतीजा
अखिल राजस्थान चिकित्सक संघ की बीकानेर इकाई के अध्यक्ष डॉ. नंदकिशोर सुथार ने बताया कि सरकार की हठधर्मिता के चलते चिकित्सक आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेवारत चिकित्सक पहले ३० अगस्त को सामूहिक अवकाश पर जाने वाले थे, लेकिन सरकार ने मांगों पर विचार करने के लिए 15 दिन का समय मांगा। साथ ही प्रदेश में मौसमी बीमारियों के चलते सामूहिक अवकाश स्थगित कर दिया था। सरकार के समय मांगने के बावजूद चिकित्सकों की मांगें पूरी नहीं होने से आक्रोशित एआरआईएसडीए ने सामूहिक अवकाश का निर्णय किया।
ये हैं मांगें
राजस्थान मेडिकल कैडर का गठन करना, चिकित्सा संस्थानों में एक पारी में ओपीडी, वेतन व भत्तों से संबंधित सभी विसंगतियों को दूर करने, ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रहे चिकित्सकों को प्री पीजी परीक्षा में 10, 20, 30 प्रतिशत बोनस अंक के फॉर्मूले को पहले की तरह निर्धारित ग्रामीण क्षेत्रों में देना, सभी पीएचसी पर दंत चिकित्सकों की नियुक्ति करना आदि मांगें शामिल हैं।
Published on:
19 Sept 2017 09:18 am
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