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नहरबंदी खत्म, फिर भी पीबीएम में नहीं बुझी प्यास, संकट पर कलक्टर से लगाई गुहार

अस्पताल में भर्ती मरीजों, उनके परिजनों, मेडिकल विद्यार्थियों और कर्मचारियों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। कई लोगों को पीने का पानी खरीदना पड़ रहा है, जबकि कई दानदाताओं की ओर से लगाए गए वाटर कैंपरों पर निर्भर हैं।
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पीबीएम अस्पताल

पीबीएम अस्पताल

नहरबंदी समाप्त होने के बावजूद सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध पीबीएम अस्पताल में पेयजल संकट लगातार बना हुआ है। जलापूर्ति में सुधार नहीं होने पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अब जिला कलक्टर से हस्तक्षेप की मांग की है। अस्पताल में भर्ती मरीजों, उनके परिजनों, मेडिकल विद्यार्थियों और कर्मचारियों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। कई लोगों को पीने का पानी खरीदना पड़ रहा है, जबकि कई दानदाताओं की ओर से लगाए गए वाटर कैंपरों पर निर्भर हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र कुमार वर्मा ने पहले जलदाय विभाग को पेयजल आपूर्ति में सुधार के लिए पत्र लिखा था। सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने अब जिला कलक्टर को पत्र भेजकर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परिसर में पर्याप्त एवं निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित कराने का आग्रह किया है। पत्र में बताया गया है कि पीबीएम अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज, उनके परिजन, छात्र-छात्राएं, रेजिडेंट चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, संकाय सदस्य और अन्य कर्मचारी मौजूद रहते हैं। अस्पताल में 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं संचालित होने के कारण निर्बाध पेयजल उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है।

वार्ड से हॉस्टल तक असर
प्राचार्य ने पत्र में उल्लेख किया है कि अनियमित जलापूर्ति के कारण अस्पताल के वार्ड, ऑपरेशन थियेटर, प्रयोगशालाएं, छात्रावास, आवासीय परिसर और सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इससे मरीजों की सुविधा के साथ-साथ संक्रमण नियंत्रण, स्वच्छता मानकों और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, पैरामेडिकल कॉलेज और जीएनएम प्रशिक्षण संस्थान में करीब 2500 से 3000 विद्यार्थी एवं कर्मचारी अध्ययन और सेवाएं दे रहे हैं। वर्तमान में उपलब्ध भूमिगत और ओवरहेड पानी की टंकियां आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त नहीं हैं, जिससे लगातार जल संकट बना हुआ है।

रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी जताई नाराजगी
पानी की किल्लत का असर मेडिकल कॉलेज के छात्रावासों पर भी पड़ रहा है। कॉलेज के एक, दो, तीन, चार और एसआर हॉस्टल में रहने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल विद्यार्थियों को रोजाना पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुखवीर सिंह सहारण ने भी प्राचार्य को ज्ञापन देकर जल्द समाधान की मांग की है।