
रितेश यादव/खाजूवाला. नहरबंदी के चलते मण्डी व ग्रामीण क्षेत्रों में अब हालात बिगडऩे लगे हैं। गांवों की डिग्गियों में पानी खत्म होने से पेयजल संकट मंडराने लगा है। विभाग भी नहरबंदी खत्म होने की पुख्ता जानकारी नहीं दे रहा है और ना ही जनप्रतिनिधि खुलकर बोल रहे हैं। खाजूवाला मण्डी अनूपगढ़ शाखा की अन्तिम छोर पर बसी है। क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों में नहर ही पेयजल का मुख्य जरिया है। इस क्षेत्र में भूजल खारा होने के कारण यहां के निवासी नहर पर ही निर्भर है। नहरबन्दी के बाद गांवों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है।
ग्रामीणों व मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करना मुश्किल होता जा रहा है। खाजूवाला मण्डी में चार डिग्गियां भरी गई थी। इनसे अलग-अलग बारियों से मण्डी में पानी की आपूर्ति की जा रही है। अब डिग्गियों में मात्र पांच हजार किलोलीटर पानी ही शेष रहा है। यह पानी मात्र चार से पांच दिन के लिए होगा। पानी के खत्म होने के बाद लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती है। कई स्थानों पर तो डिग्गियों में मात्र एक फीट तक ही पानी बचा है।
यहां बड़ी आबादी वाले गांव 8 केवाईडी, 20 बीडी, आनन्दगढ़, दंतौर व बल्लर आदि में ग्रामीण पानी की किल्लत को लेकर जूझना शुरू हो गए है। दंतौर में जलदाय विभाग फिलहाल पांच दिन के अन्तराल से पानी दे रहा है। लेकिन गर्मी तेज होने के साथ ही पानी की किल्लत और बढ़ सकती है। गांवों में पेयजल संकट को लेकर जलदाय विभाग भी गंभीर है लेकिन नहरी पानी के अलावा और कोई जलस्रोत नहीं होने के कारण चिंता बढ़ती जा रही है।
वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
क्षेत्र के 4 से 17 केएचएम तक, बल्लर, 18 बीएलडी, बकड़ा आबादी, सम्मेवाला सहित कई चक व आबादियों में पानी खत्म हो गया है यदि आगामी पांच दिन और पानी नही मिला तो सरहदी गांवों में संकट खड़ा हो जाएगा। फिलहाल गांवों में पानी की उपलब्धता के आधार पर आपूर्ति की जा रही है और चार-पांच दिन के अन्तराल से पानी दिया जा रहा है। आगामी समय के लिए वैकल्पिक व्यवस्था से आपूर्ति की संभावना नहीं है।
असरासर में गहराया पेयजल संकट
महाजन. असरासर गांव में गत दो-ढाई माह से पेयजल संकट से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव के युवा आदेश गुरिया ने बताया कि असरासर में लालेरां वाटर वक्र्स से पानी की आपूर्ति होती है लेकिन पिछले तीन माह से पेयजल व्यवस्था बदहाल है। अब गर्मी बढऩे के साथ ही हालात बिगडऩे लगे है। फायरिंग रेंज एरिया से सटे इस गांव में प्रतिदिन सैकड़ों आवारा पशु प्यास बुझाने आते है। परन्तु खेळियों व जीएलआर में पानी नहीं होने से आवारा पशु प्यास से तड़पकर मर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि नहर का दूषित पानी एक हजार रुपये प्रति टैंकर की दर से मंगवाना पड़ रहा है। दूषित पानी पीने से लोगों में जलजनित बीमारियां फैलने की आशंका बन रही है। ग्रामीणों ने बताया कि समस्या को लेकर क्षेत्रीय विधायक व विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करवाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
Published on:
28 Apr 2018 02:45 pm
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