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सहजन से सुधरा महिलाओं का स्वास्थ्य, यह सुपरफूड बना आमदनी का जरिया

किचन गार्डन में सहजन के पौधे लगवाने की शुरुआत, अब महिलाएं कर रही व्यवसायिक स्तर पर उत्पाद तैयार।

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सहजन से सुधरा महिलाओं का स्वास्थ्य, यह सुपरफूड बना आमदनी का जरिया

सहजन से सुधरा महिलाओं का स्वास्थ्य, यह सुपरफूड बना आमदनी का जरिया

दिनेश कुमार स्वामी

सुपरफूड माने जाने वाले सहजन (ड्रमस्टिक और मोरिंगा) के पौधे लगाकर बीकानेर में की गई छोटी सी शुरुआत आज मील का पत्थर साबित हो रही है। यह महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार करने के साथ उनकी आमदनी का भी बड़ा जरिया बन गई है। इस पहल आंगनबाड़ी केन्द्रों में अप्रेल 2022 में की गई थी।

पौधे लगवाने से शुरू की गई यह पहल आज जिले में 650 महिलाओं के लिए 15 हजार रुपए मासिक आमदनी का जरिया बन चुकी है। सहजन फली की एक प्रॉसेस यूनिट भी लग गई है। फिलहाल, इसके दो प्रोडक्ट बाजार में उतार कर छह महीने में चार लाख रुपए के उत्पाद बेचे जा चुके हैं।

कुपोषण से मुक्ति और मातृ मृत्युदर में कमी लाने के लिए दो साल पहले तत्कालीन जिला कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल ने सहजन के पौधे जिले के 1350 आंगनबाड़ी केन्द्रों में लगवा कर किचन गार्डन तैयार करवाए थे। यह बहुउपयोगी पौधा है। इसकी पत्ती से लेकर फूल और फली औषधीय गुणों वाली है।

इनके पत्ते, फूल-फली की सब्जी, आचार और पाउडर बनाकर उपयोग किया जाता है। दाल में इसकी पत्तियों-फली को डाल कर भी खा सकते हैं। इसका प्रचार-प्रसार हुआ, तो गांव-गांव घरों में क्यारियों में इसके पौधे लगने लगे हैं।

मॉडल चरागाह में इसके पौधे लगाने के बाद अब इसकी फलियां-पत्तियों और फूलों को प्रॉसेस कर उनका पाउडर बनाकर व्यावसायिक स्तर पर बेचने का प्रोजेक्ट बीकानेर में शुरू कर दिया गया है।

पहला परिणाम: मातृ मृत्युदर में कमी आई

प्रसव के दौरान मातृ मृत्युदर जिले में वर्ष 2021 में जहां 100 रही। बाद में यह दिसम्बर 2023 तक सालाना घटकर 23 पर आ गई। जिला प्रशासन ने प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र के माध्यम से जिले में 20 हजार से ज्यादा घरों के किचन गार्डन में यह पौधे लगवाए हैं।

दूसरा परिणाम: बालिकाओं में हिमोग्लोबिन बढ़ा

जिला प्रशासन ने 2022 में जिले के सभी स्कूलों में बच्चियों का हिमोग्लोबिन चेक करवाया। जनवरी 2024 में पुन: जांच करवाने पर ढाई लाख बच्चियों का हिमोग्लोबिन बढ़ कर 11 एमजी/डीएल से अधिक मिला। जबकि पहले यह 7 से भी कम था। एनीमिया के खिलाफ अभियान में सहजन पौधे को दैनिक खान-पान में शामिल करने से बड़ा फायदा हुआ।

तीसरा परिणाम: कुपोषण में कमी

दक्षिण भारत में सहजन फली को खाने में दैनिक रूप से उपयोग करते हैं। सांभर दाल में तो यह फली आवश्यक सामग्री है। इससे वहां कुपोषण की दर भी सबसे कम है। फलियां और पत्तियों का पाउडर खाने से शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी नहीं रहती। प्रशासन ने इसका खाने में उपयोग बढ़ाने के लिए खूब प्रचार प्रसार किया है। इससे कुपोषण के मामलों में कमी आई है।

चौथा फायदा: महिलाओं को आमदनी

नाबार्ड के डीडीएम रमेश ताम्बिया ने बताया कि राजीविका से जुड़ी महिलाओं के माध्यम से कोलायत, श्रीडूंगरगढ़ और बीकानेर में नौ मॉडल चरागाहों में पौधों के 17 प्लांट लगाए गए हैं। इनसे फूल, पत्तियां और फली तीनों को तोड़ने का कार्य महिलाएं ही करती हैं। प्रॉसेसिंग यूनिट में वैज्ञानिक तरीके से पीसकर पाउडर तैयार करने का यह प्रोजेक्ट सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) के माध्यम से चलाया जा रहा है।

यूं मिला महिलाओं को रोजगार

प्रॉसेसिंग प्लांट कोलायत के बींठनोक में अगस्त 2023 में लगाया गया। इसमें मशीनों के माध्यम से प्रॉसेसिंग कर पाउडर बनाने के काम में करीब 400 महिलाओं को रोजगार मिला है। इसी तरह बीकानेर और श्रीडूंगरगढ़ में करीब ढाई सौ महिलाओं को पौधे लगाने, पत्तियां और फलियां तोड़ने का काम मिला है। बींठनोक की भगवती धामू और निरमा ने बताया कि इससे जुड़ने के बाद अब दस से 15 हजार रुपए की मासिक आमदनी हो रही है।

जानिए इस सुपरफूड को

सहजन फली मुलायम से शुरुआत होकर लंबी और धीरे-धीरे सख्त होती जाती है। औधधियों में तो इसकी बीज, पत्तियां, फल और जड़ तक भी उपयोग होता है। इसके पत्तियों और फलियों को पीसकर पाउडर बनाकर पैकिंग कर बाजार में उतारी गई है।